फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देरी के चलते फंसी कान्हा पशु आश्रय योजना

Sun, 11 Mar 2018 12:53 AM IST
Lalitpur
विज्ञापन
animal - फोटो : demo
विज्ञापन
जिले के दैलवारा ग्राम में बनाया जा रहा कान्हा पशु आश्रय स्थल निर्माण कार्य में देरी के चलते फंसकर रह गया है। इसके लिए 31 दिसंबर 2017 तक की समय सीमा तय की गई थी, जो पूरी हो चुकी है। शासन की तरफ से पहली किस्त 1 करोड़ 48 लाख रुपये नगर पालिका को प्राप्त भी हो चुकी है, लेकिन ठेकेदार को भुगतान अब तक नहीं किया गया। धनाभाव के चलते ठेकेदार ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन


बुंदेलखंड में अन्ना जानवरों के विचरण की समस्या किसी से छिपी नहीं है। इससे निपटने के लिए कान्हा पशु आश्रय योजना के तहत कांजी हाउस का निर्माण किया जाना है। इस निर्माण के लिए शहर के निकटवर्ती ग्राम दैलवारा में चार एकड़ भूमि अधिग्रहीत की गई है। इस पर ठेकेदार ने फाउंडेशन स्तर का कार्य भी किया। इसके उपरांत धन की समस्या आड़े आने लगी। ठेकेदार ने उस काम को बीच में ही रोक दिया है। इसकी प्रमुख वजह, इस मद में अवमुक्त हुई धनराशि की व्यय समयावधि 31 दिसंबर 2017 का गुजर जाना है। ऐसे में उस धन का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।

एक बार रद हो चुकी है जमीन की अनुमति
इसके पहले इसे खिरकापुरा स्थित श्मशान घाट की खाली भूमि पर निर्माण की स्वीकृति मिलने का बाद कार्य शुरू था। उस दौरान नागरिकों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। लेकिन, काम रुका नहीं। जैसे ही डीएम मानवेंद्र सिंह ने जिले की कमान संभाली तो यह मामला फिर गर्मा गया। लोगों का आरोप था कि कांजी हाउस की भूूमि का अधिकांश हिस्सा नाले के डूब क्षेत्र में आ रहा है तो श्मशान घाट का भी स्वरूप बिगड़ रहा है। इस पर उन्होंने मौके का निरीक्षण करते हुए जमीन की अनुमति को रद्द कर दिया। उसके बाद नए सिरे से जमीन तलाशी गई। जिसमें ग्राम दैलवारा की भूमि को उपयुक्त पाया गया।
विज्ञापन


यह है मामला
2015 में कान्हा आश्रय स्थल निर्माण की योजना पास हुई थी।  जिसकी लागत 3 करोड़ 48 लाख रुपये थी। ठेकेदार प्रमोद चौबे ने शमशान भूमि पर बनने वाले पशु आश्रय शाला के निर्माण की जिम्मेदारी ली थी। मई 2017 में छह माह तक निर्माण कार्य चलाया गया। ठेकेदार का कहना है कि पहली बार चिह्नित स्थल पर मिट्टी फिलिंग, समतलीकरण, सीसी कॉलम, बीम, फाउंडेशन और दीवार निर्माण का काम हो चुका है। इसमें 35 लाख रुपये का खर्च आया था, जिसका भुगतान अबतक नहीं किया गया।  निर्माण स्थल बदलने के बाद दैलवारा में बन रहे आश्रय स्थल के निर्माण की जिम्मेदारी भी प्रमोद को दी गई है। जनवरी 2018 में फाउंडेशन का कार्य भी किया गया है, जबकि भुगतान नहीं किया गया इस वजह से एक महीने से कार्य रुका पड़ा है।

सभासदों की सहमति नहीं होने से भुगतान रुका
शमशान घाट पर कराए गए निर्माण का भुगतान ठेकेदार द्वारा मांगा जा रहा है।  पिछले दिनों पालिका की बोर्ड बैठक में ठेकेदार को 35 लाख रुपये के भुगतान का प्रस्ताव आया था। लेकिन, सभासदों ने इसके भुगतान पर सहमति नहीं बन सकी। उनका कहना था कि पहले बन रहे पशु आश्रय स्थल को जिलाधिकारी ने रद्द किया था। इसलिए पुराने भुगतान का मामला पहले जिलाधिकारी के समक्ष लाया जाय, उसके बाद पालिका की बोर्ड बैठक में उठाया जाए।

काम शुरू नहीं हुआ तो ठेकेदार को देंगे नोटिस
 टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण होने के उपरांत संबंधित फर्म को निर्माण का काम सौंपा गया है। यदि वह काम शुरू नहीं करता है तो उसे नोटिस दिया जाएगा। जहां तक धनराशि के इस्तेमाल की तिथि बढ़वाने की बात है तो उसके लिए शासन को पत्र भेजा गया है।
- अवनींद्र कुमार, अधिशासी अधिकारी
नगर पालिका परिषद ललितपुर।

 विभाग की तरफ से हुई देरी
नगर पालिका परिषद ने पहले शमशान घाट स्थल की भूमि पर निर्माण के लिए अनुबंध किया था। जिसे निरस्त करते हुए अब ग्राम दैलवारा में करीब चार एकड़ में भूमि पर कार्य के लिए अनुबंध हुआ है। इस पूरी प्रक्रिया में विभाग की ओर से लेटलतीफी हुई, जिससे काम समय से पूरा नहीं हो सका। पूर्व में जो काम कराया है, उसका भुगतान पालिका से मांगा है। वहीं, पालिका ने भी धनराशि खर्च करने की समयावधि बढ़ाने के लिए शासन को पत्र लिखा है। जैसे ही शासन से स्वीकृति मिलती है, वैसे ही कांजी हाउस का काम प्रारंभ कर दिया जाएगा।
विज्ञापन

प्रमोद कुमार चौबेठेकेदार, नगर पालिका
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें