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प्रभु यीशु ने लिया जन्म, गूंजा मैरी क्रिसमस

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गोविंद सागर बांध स्थित ईसीआई चर्च में चरनी में जन्मे प्रभु यीशु की झांकी। - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। बृहस्पतिवार की आधी रात को प्रभु यीशु के जन्म लेते ही चर्च में हैप्पी क्रिसमस और मैरी क्रिसमस गूंज उठा। मसीही समुदाय के लोगों ने एक- दूसरे को क्रिसमस की बधाई दी और केक खिलाकर एक- दूसरे का मुंह मीठा कराया। घरों में भी लोगों ने जश्न मनाया।
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बृहस्पतिवार को शाम को चर्च में पहुंचे लोगों ने केवल प्रार्थना की और वापस लौट गए। इस संबंध में सेंट जॉन्स सीएनआई चर्च के फादर सैमसन जलाल ने बताया कि कोविड नियमों की गाइड लाइन का पालन करते हुए इस बार कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किए गए। शुक्रवार की सुबह प्रार्थना और अन्य कार्यक्रम सामाजिक दूरी का पालन करते हुए किए जाएंगे। बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें गीत व कविताएं प्रस्तुत की जाएंगी। उन्होंने क्रिसमस ट्री के महत्व के बारे में बताते हुए कहा कि प्रभु यीशु के विचारों एंव आदर्शों को यह ट्री दर्शाता है। क्रिसमस ट्री सजाने की परंपरा जर्मनी में शुरू हुई। अमेरिका में 1912 में एक बच्चे के कहने पर उसके पिता ने क्रिसमस ट्री सजाया था। फिर यह परंपरा संपूर्ण विश्व मेें फैल गई। क्रिसमस ट्री से घर में सकारात्मक ऊर्जा आने के साथ वास्तुदोष भी दूर होता है।
गोविंद सागर बांध स्थित ईसीआई चर्च के फादर किशोर मैथ्यूज ने बताया कि रात में प्रभु यीशु के जन्म लेते ही हैप्पी क्रिसमस की बधाइयां मिलनी शुरू हो गईं। अधिकांश लोगों ने मोबाइल पर ही एक- दूसरे को बधाई दी। जन्मोपरांत सभी को प्रभु यीशु का प्रेम संदेश सुनाया गया। सेंट जॉन्स बास्को चर्च के फादर जॉन्स ने बृहस्पतिवार की शाम चर्च में प्रार्थना की और उपस्थित लोगों को प्रभु यीशु का संदेश सुनाया। आधी रात को प्रभु यीशु के जन्म लेते ही समूचा चर्च मैरी क्रिसमस और हैप्पी क्रिसमस से गुंजायमान हो गया। तत्पश्चात सेंटा क्लॉज ने बच्चों में उपहार बांटे। उपस्थित लोगों ने केक खिलाकर एक- दूसरे को सामाजिक दूरी का पालन करते हुए बधाई दी। फादर जॉन्स ने बताया कि शुक्रवार की सुबह प्रार्थना के साथ ही प्रभु यीशु के संदेश सुनाए जाएंगे।
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