ललितपुर। अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) ने दहेज की खातिर पत्नी की हत्या के मामले में लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता को दोषी पाते हुए दस वर्ष कैद की सजा सुनाई है। मामला 25 साल पुराना है।
सहायक शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने बताया कि जिला हमीरपुर के राठ निवासी नवल किशोर नगाइच ने कोतवाली पुलिस को तहरीर दी थी कि उसकी भतीजी सरिता की शादी 19 अप्रैल 1995 में महेंद्र कुमार पुत्र छोटेलाल दुबे निवासी कस्बा महोबा के साथ हुई थी। महेंद्र कुमार ललितपुर में लघु सिंचाई विभाग में कार्यरत हैं और चड्ढा वकील के मकान में कृष्णा टॉकीज के पास पत्नी सरिता के साथ किराए पर रहता था। शादी के बाद से ही सरिता के पति महेंद्र दुबे, उसका देवर पप्पू दहेज के लिए उसकी भतीजी को परेशान करते थे।
भतीजी को धमकी दी थी कि 50 हजार रुपये नहीं दिए तो उसकी जान की खैर नहीं। वह अस्थाई नौकरी को पक्का कराने के बहाने से रुपये मांग रहे थे। 19 अक्तूबर 1995 की सुबह उन्होंने कमरा बंद करके सरिता को जलाकर मार डाला। 50 हजार रुपये की बात सरिता ने करवा चौथ वाले दिन अपने पिता को बताई थी जब वह करवा चौथ का सामान देने ललितपुर उसके पास आए थे। मरने के कुछ दिन पहले उसने अपने भाई से भी यह बात बताई थी। उन्होंने बताया कि सरिता की मौत की खबर मिलते ही ललितपुर आने पर उन्हें हत्या की जानकारी हुई। उनके ललितपुर आने से पूर्व वह लोग सरिता का शव अस्पताल ले जा चुके थे। जिस पर कोतवाली पुलिस ने मामले में आरोपी पति महेंद्र दुबे, देवर पप्पू और ससुर छोटेलाल के खिलाफ दहेज की मांग करने, दहेज की खातिर हत्या करने में दहेज अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया था। पुलिस ने विवेचना में दो आरोपियों ससुर छोटे लाल दुबे और देवर पप्पूू के नाम मुकदमे से बाहर कर दिए थे और मुख्य अभियुक्त पति महेंद्र दुबे के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। बुधवार को न्यायालय ने मामले में सुनवाई करते हुए अभियुक्त महेंद्र दुबे को पत्नी की दहेज की खातिर हत्या के मामले में दोषी सिद्ध पाया गया था, न्यायालय ने सजा के बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 31 अक्तूबर की तारीख मुकर्रर कर दी थी। शनिवार को न्यायाधीश ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए अपराधी महेंद्र दुबे को दस वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।