पाली तहसील के जंगल के किनारे अंतिम छोर पर बसे पारोल, बरखेरा गांव में अंग्रेजी शासन में जामनी नदी पर पुल बनाया गया था, जो देखरेख के अभाव में पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है। जिससे राहगीरों को निकलने में परेशानी हो रही है। ग्रामीणों द्वारा शिकायत के बाद भी पुल को सही नहीं कराया जा रहा है।
बताते चलें कि क्षेत्र के 12 से अधिक गांवों से जिला अस्पताल मुख्यालय आने जाने वाले राहगीरों को करीब बीस किलोमीटर लंबी दूरी का चक्कर काटकर तय करना पड़ता है। ग्रामीण क्षतिग्रस्त पुल को बनवाने की मांग काफी समय से कर रहे है, नेताओं ने खूब आश्वासन दिए, लेकिन अब तक सकारात्मक पहल किसी ने नही की। विगत वर्षों से लोग परेशानियां झेलते चले आ रहे हैं लेकिन इस सुधार कार्य नहीं किया गया है। बरसात के दिनों में राहगीरों को पुल पार करना बड़ा मुश्किल भरा होता है। ग्रामीणों ने बताया कि यह पुल उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश राज्यों को आपस जोड़ने का कार्य करता है, लेकिन देखरेख के अभाव में पुल क्षतिग्रस्त होता चला गया। जिससे लोगों ने इस सड़क से आना जाना बंद कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल बन जाने से दर्जनों गांव के लोगों सुविधा होगी। इससे पहले विधानसभा चुनाव में पुल निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने गांव के पहले काले झंडे बैनर लगाकर विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया था। जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने वोटरों को खूब मनाया, लेकिन वह नहीं मानें थे।
कई वर्षों से हम लोग इस पुल के लिए संघर्षरत है अभी तक जन प्रतिनिधियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
चंदन सिंह, प्रधान प्रतिनिधि, पारौल
शासन प्रशासन को इस पुल की ओर विशेष ध्यान देना चाहिए। जिससे क्षेत्र के लोगों को सुविधा हो सके।
अजय प्रताप सिंह मझले राजा, प्रधान, खिरिया उवारी
पुल बनने से दर्जनों गांव के लोगों का होगा भला। इस पुल से एक दर्जन से अधिक गांव लोग निकलते हैं रोज सैकड़ों वाहनों का आवागमन होता है।
दिलीप कुमार सोनी, प्रधान नाराहट
पुल के निर्माण के लिए नौ करोड़ रुपये का स्टीमेट बनाकर भेज दिया गया है। इस संबंध में चीफ अभियंता और प्रमुख सचिव से बात भी की गई है। पुल के लिए बजट मिलते ही निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा।
मनोहर लाल पंथ मन्नू कोरी, श्रम व सेवायोजन राज्यमंत्री