सिंचाई और पेयजल के साथ धार्मिक मेले में स्नान के लिए छोड़ा जाता है बांध से पानी
एमसीएम पानी रहता है आरक्षित, प्रतिवर्ष नहर-रजवाहा के जरिए पहुंचाया जाता है मेले तक पानी
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जिले के सबसे पुराने बांधों में शुमार जामनी बांध जहां जनपद किसानों के खेतों को सिंचाई के लिए उपयोगी है। साथ ही पाइप पेयजल परियोजना के लिए भी पानी उपलब्ध कराता है। वहीं बांध सिंचाई के साथ धार्मिक मेले में स्नान के लिए भी किया जाता है। अंजनी माता मंदिर पर लगने वाले मेले के लिए जामनी बांध से एक एमसीएम पानी प्रतिवर्ष छोड़ा जाता है। इस साल मेले के लिए पानी छोड़ने की तैयारी में सिंचाई विभाग जुट गया है।
जामनी बांध का निर्माण वर्ष 1973 में हुआ था। बांध का पूर्ण जलस्तर 403.55 मीटर है। जबकि न्यूनतम जलस्तर 396.39 मीटर है। बांध में पानी आरक्षित करने की क्षमता 92.80 मिलियन घन मीटर है। बांध से संचालित होने वाली नहरों के जरिए दो दर्जन गांवों में करीब 11 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित की जाती है। इसके साथ ही 80 से अधिक गांवों में पेयजल के लिए जलापूर्ति होती है। नमामि गंगे योजना के तहत हर घर जल नल परियोजना के लिए भी बांध से पानी आरक्षित किया गया है।
इस प्रकार से जिले के सबसे पुराने बांधों में शुमार होने वाला जामनी बांध महरौनी तहसील क्षेत्र के लिए जीवनदायिनी बना हुआ है। बांध में भरने वाले पानी को सिंचाई, पेयजल के साथ साथ धार्मिक आयोजन के लिए भी आरक्षित किया जाता है। जिसमें महरौनी क्षेत्र में आयोजित होने वाले अंजनी माता मेले के लिए एक एमसीएम पानी आरक्षित रहता है। जोकि प्रति वर्ष मार्च-अप्रैल माह में आयोजित होने वाले मेले के लिए छोड़ा जाता है। यह पानी बांध की दांयी नहर से करीब 25.500 किलोमीटर जाने के बाद टीकमगढ़ रजवाहा के जरिए मेला तक पहुंचाया जाता है। इस साल आयोजित होेने वाले अंजनी मेले के लिए एक एमसीएम पानी छोड़ने की तैयारियां सिंचाई विभाग ने शुरू कर दी है।
एमपी को भी आरक्षित है 17 फीसदी पानी
जामनी बांध निर्माण के बाद 1974 में यूपी-एमपी के बीच हुए समझौते के आधार पर इसका 17 फीसदी पानी मध्य प्रदेश के लिए आरक्षित किया गया था। मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ को सिंचाई के लिए बांध से 13 किमी लंबी नहर के जरिए 60 क्यूसेक पानी दिया जाता है।
अंजनी माता मंदिर पर आयोजित होने वाले मेले के लिए प्रतिवर्ष एक एमसीएम पानी बांध से दिया जाता है। जोकि नहर व टीकमगढ़ रजवाहा के जरिए यहां तक पहुंचाया जाता है। इस साल पानी देने के विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी है। -इं. सलमान खान, सहायक अभियंता सिंचाई खंड