पाली(ललितपुर)। आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज ने कहा कि जीवन की यात्रा में साधक को जब सत्य की पहचान हो जाती है, तो वैराग्य आने में क्षण भी नहीं लगता। उन्होंने त्याग को वैराग्य का कारण बताया और कहा श्रावकों को जीवन में इसकी भावना बनाए रखने में ही शांति है।
सुबह पंचकल्याणक महोत्सव में तपकल्याणक का पूजन-अभिषेक हुआ। इस मौके पर जयनिशांत भैया, नितिन भैया खुरई, ब्रह्मचारी अशोक जी लिधौरा, सनतकुमार रजवांस, धीरज भैया राहतगढ़ आदि मौजूद रहे। वहीं, मध्याह्न में राजा सुदर्शन के दरबार में मुकुटबद्ध राजाओं ने राजषी वस्त्र में भेंट समर्पित की। रात्रि में क्षुल्लिका भक्ति भूषण माताजी ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि परिणामों की विशुद्धि श्रावकों में बनी रहे, तभी संस्कृति सुरक्षित रहेगी।
संगीतकार रामकुमार भोपाल के मार्गदर्शन में आरती की र्गई, जिसमें इंद्र- इंद्राणि प्रभु की भक्ति में झूम उठे।
वहीं, रूपेश जैन ने आचार्यश्री ज्ञानसागर महाराज के तप व त्याग पर भक्तिगीत प्रस्तुत किए। महोत्सव मे पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रदीप जैन ‘आदित्य’ ने कहा कि तीर्थ हमारे प्राण हैं, जिनका संरक्षण करना सभी का दायित्व है। इस दौरान महोत्सव समिति के कार्य अध्यक्ष महेंद्र जैन बड़ागांव, प्रवीण जैन झांसी, सनत सिंघई, दयाचंद सराफ और वीर चंद जैन ने पूर्व केंद्रीय मंत्री को सम्मानित किया। कार्यक्रम में राजेश जैन, शिखरचंद, संतोष जैन, कपूरचंद जैन, राजेंद्र चौधरी, तेजी राम पठया, डॉ. सुंदरलाल जैन, श्रयांस जैन, अजित बैसा व कैलाश जैन आदि का योगदान रहा।
कवि सम्मेलन आज
महोत्सव के मीडिया प्रभारी अक्षय अलया ने बताया कि प्रतिष्ठा महोत्सव में बुधवार को ज्ञान कल्याणक में सुबह अभिषेक पूजन के बाद श्रीअरनाथ विधान, आचार्यश्री के प्रवचन, मध्याह्न में मंत्रानुष्ठान, अधिवासना व केवल ज्ञान के उपरांत अखिल भारतीय दिगंबर जैन शास्त्री परिषद की कार्यसमिति का अधिवेशन, केवलज्ञानोत्पति, समोवशरण, पूजा दिव्य ध्वनि व रात्रि में संगीतमय आरती के बाद रात्रि आठ बजे से अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन होगा।