मड़ावरा। श्री महावीर दिगंबर जैन संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय साढूमल में विराजमान आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री सुप्रभ सागर एवं मुनिश्री प्रणत सागर महाराज ने विद्यार्थियों को परीक्षा के टिप्स दिए। इस दौरान मुनिश्री सुप्रभ सागर महाराज ने कहा कि कल का पुरुषार्थ ही आज का भाग्य है।
मुनिश्री ने कहा कि कल हमने जो भी पुरुषार्थ किया था, वह भाग्य स्वरूप आज प्राप्त है। जो पुरुषार्थ आज करेंगे, वह कल प्राप्त होगा, इसीलिए हमें पुरुषार्थ करना चाहिए। बच्चों को पूरी मेहनत से पढ़ना चाहिए, क्योंकि पुरुषार्थ ही अच्छे अंक दिलाता है। तनाव से मुक्त होकर परीक्षा दें। मुनिश्री प्रणत सागर महाराज ने कहा कि हमें वह शिक्षा प्राप्त करनी है, जिसमें संस्कार भी हों। भारतीय संस्कृति का संरक्षण हो, धर्म की सुरक्षा हो, संस्कारों से ही संस्कृति जीवित रहेगी।
प्रारंभ में मंगलाचरण विद्यालय की अध्यापिका राजुल एवं समदर्शी जैन ने किया। मुनिराज के पाद प्रक्षालन का अवसर जैन संस्कृत विद्यालय स्टाफ को प्राप्त हुआ। मुनिद्वय को शास्त्र भेंट करने का अवसर जिनवाणी प्रभावना महिला मंडल साढूमल को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रधानाचार्य विनीत कुमार जैन ने किया।
इस मौके पर अध्यक्ष गुलाब चंद्र बरचोंन, कमल कुमार, कैलाश बंधी, निर्मल कुमार सिंघई, जय कुमार, देवेंद्र झंडा, ज्ञानचंद्र जैन, वर्धमान जैन, अनिल जैन बेसरा, जीवन कुमार जैन, शैलू पारस, मुकेश जैन, चक्रेश जैन, अंशुल, अखिलेश, सुरेंद्र जैन, अंकित, विद्यालय परिवार के सदस्यों में सौंरई पंचकल्याणक में सपत्नी और माता-पिता बनने का सौभाग्य प्राप्त कर चुके संतोष जैन, राजेंद्र जैन, अनीस, शुभम, रोहित, माधुरी श्रीवास्तव, कस्बा लखनादौन, महरौनी, टीकमगढ़, मड़ावरा, सैदपुर आदि स्थानों से आए श्रद्धालु उपस्थित थे।
मुनिश्री हैं बहु भाषाविद
मुनिद्वय से निकटता से जुड़े डॉ. सुनील संचय बताते हैं कि श्रमण मुनि श्री सुप्रभ सागर महाराज का जन्म महाराष्ट्र के सोलापुर में हुआ है। मातृभाषा मराठी, लौकिक शिक्षा सीए होने के बाद भी संस्कृत, प्राकृत, हिंदी, कन्नड़, अंग्रेजी आदि भाषाओं का ज्ञान है। बुंदेलखंडी भी खूब बोलते हैं। आपकी प्रवचन शैली मन को मोहने वाली है। मुनिश्री प्रणत सागर महाराज की जन्मभूमि ललितपुर है। हाल ही में मुनिद्वय के सानिध्य में मड़ावरा, सौंरई और रमगढ़ा में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव सफलता के साथ संपन्न हुए हैं।