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विभागीय जांच में डीसीएमओ समेत चिकित्सक पाए गए निर्दोष

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ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग में बीते माह हटाए गए कोविड कर्मियों के मामले विभागीय अधिकारियों में विवाद की स्थिति बन गई थी। इस पर डीपीएम एनएचएम द्वारा डीसीएमओ समेत दो चिकित्सकों पर हटाए गए कर्मियों को भड़काने व शोषण और मानसिक दबाव बनाए जाने के आरोप लगाए थे। जिस पर सीएमओ ने जांच कमेटी से जांच कराई, जिसमें लगाए गए आरोप असत्य गलत पाए गए हैं।
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बीते माह जिला कार्यक्रम प्रबंधक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन रजिया फिरोज ने जिलाधिकारी को पत्र दिया था, जिसमें मानक से अधिक कर्मचारियों की तैनाती के कारण हटाए गए कर्मियों को डीसीएमओ डॉ. आरएन सोनी व डॉ. राजेश भारती और डॉ देशराज आदि पर भड़काने का आरोप लगाया था। साथ ही 18 मई को अज्ञात लोगों ने गाड़ी में पत्थर मारकर शीशा तोड़ने का आरोप लगाते हुए सभी पर मानसिक दबाव बनाने व शोषण करने के आरोप को लेकर जांच कर कार्रवाई की मांग की थी। इस पर सीएमओ ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर जांच कराई। जिसमें सभी आरोप निराधार पाए गए हैं।
एसीएमओ डॉ. एमसी पाल, डीसीएमओ डॉ. हुसैन खान व जिला अस्पताल के ईएनटी सर्जन डॉ. महेश गुप्ता ने संयुक्त रूप से सीएमओ को सौंपी जांच रिपोर्ट में बताया कि जिन कर्मचारियों द्वारा डॉ. राजेश भारती के खिलाफ बयान दिए थे, उन सभी ने जांच कमेटी के सामने उपस्थित हुए और बताया कि निलंबित वरिष्ठ लिपिक ने दबाव बनाकर फर्जी हस्ताक्षर कराए हैं। उन सभी को डॉ. भारती से किसी भी प्रकार कोई शिकायत नहीं है। जिला कार्यक्रम प्रबंधक रजिया फिरोज के पक्ष में हमसे हस्ताक्षर करवाए गए हैं। कोविड-19 के हटाए गए आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने भी बताया कि डॉ. भारती ने नहीं भड़काया है और न ही कोई संबंध है।
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जिला कार्यक्रम प्रबंधक नहीं कर पाईं साक्ष्य प्रस्तुत
जांच टीम ने बताया कि जिला कार्यक्रम प्रबंधक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन रजिया फिरोज द्वारा दी गई शिकायत के पक्ष में किसी भी प्रकार का ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर पाईं। इस पर डॉ. राजेश भारती प्रथम दृष्टता निर्दोष हैं। शिकायत पूरी तरह से असत्य व निराधार है।
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