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Lalitpur News: फर्जी तरीके से पुलिस की नौकरी पाने के मामले की जांच तेज

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संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। फर्जी दस्तावेज के सहारे मृतक आश्रित में पुलिस विभाग में नौकरी हासिल करने और प्रपत्र गायब करने के मामले की विवेचना पुलिस ने शुरू कर दी है। प्रारंभिक तौर पर पुलिस मृतक आश्रित के अभिलेख गायब करने वाले तत्कालीन भर्ती लिपिक के बारे में जानकारी करने में जुटी है।
कोतवाली सदर में शनिवार को एसपी कार्यालय में भर्ती लिपिक अरुण कुमार मौर्य की तहरीर पर मुख्य आरक्षी प्रमोद कुमार तिवारी निवासी तिवारिन का बड़ा डेरा सरकंडी असोथर, फतेहपुर और तत्कालीन भर्ती लिपिक, प्रधान लिपिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। मुख्य आरक्षी प्रमोद पर आरोप है कि उसने तथ्यों को छिपाकर फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के जरिये 1991 में मृतक आश्रित कोटे से पुलिस विभाग में नौकरी हासिल की। जबकि, उसका बड़ा भाई मृतक आश्रित कोटे से 1988 में पहले ही पुलिस विभाग में नौकरी हासिल कर चुका था।
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वहीं, जनपद में तैनात रहे तत्कालीन भर्ती लिपिक, प्रधान लिपिक ने मृतक आश्रित के रूप में 1991 में भर्ती होने के रजिस्टरों, प्रपत्रों को नष्ट कर दिया था। इसका नतीजा यह हुआ कि धोखाधड़ी से नौकरी पाने वाला सिपाही प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोशन के बाद मुख्य आरक्षी बन गया। पुलिस विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा निकलकर सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मचा रहा। कोतवाली पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच में जुटी है। तत्कालीन भर्ती लिपिक, प्रधान लिपिक की पहचान करने में जुटी है।
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छोटे भाई की पत्नी ने की थी एडीजी प्रयागराज से शिकायत : आरोपी मुख्य आरक्षी प्रमोद कुमार तिवारी के बड़े भाई, जो 1988 में मृतक आश्रित कोटे से फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों पर नौकरी हासिल कर चुका था, के खिलाफ जनपद महोबा में वर्ष 2023 में मुकदमा दर्ज किया गया था। अखिलेश तिवारी के फर्जी तरीके से नौकरी करने की शिकायत उसके छोटे भाई प्रमोद कुमार तिवारी की पत्नी राधा देवी ने अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज से की थी। इसकी जांच के बाद अखिलेश पर महोबा में मुकदमा दर्ज हुआ था।
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तत्कालीन एएसपी की जांच में खुला था भेद : महोबा पुलिस द्वारा मुख्य आरक्षी अखिलेश तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद अखिलेश ने पुलिस को बताया था कि उसने व उसके भाई प्रमोद कुमार तिवारी ने मृतक आश्रित कोर्ट से नौकरी पाई थी। इसके बाद प्रमोद कुमार तिवारी की भर्ती को लेकर महोबा पुलिस ने जनपद पुलिस से पत्राचार किया था। इसकी जांच तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक गिरजेश कुमार ने की थी। एसपी कार्यालय के प्रधान लिपिक शाखा से मृतक आश्रित रजिस्टर व रिकार्ड रूप से स्थायी एचओबी रजिस्टर नष्ट होना पाया गया था।
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