ललितपुर। आर्यिका पूर्णमति माताजी ने कहा कि कोई भी पुत्र माता- पिता के ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकता है। भारतीय संस्कृति में माता- पिता अतुलनीय हैं। वह जनक- जननी सम्मान समारोह से पूर्व धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं। समारोह में तीन सौ से अधिक युवाओं ने वृद्ध लोगों की सेवा का संकल्प लिया।
श्री क्षेत्रपाल मंदिर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ, जो बुजुर्गों के लिए समर्पित रहा। दीप प्रज्जवलन बुजुर्ग राजाराम बंट वाले और कस्तूरी बाई ने किया। नवयुवकों ने उन्हें अपने कंधों पर उठाकर जयकारे लगाए। शास्त्र भेंट प्रेमचंद और अमिताभ जैन बड़कुल ने किया। इस मौके पर आर्यिकाश्री की प्रेरणा से तीन सौ से अधिक युवाओं ने वृद्ध माता-पिता की सेवा करने का संकल्प लिया। ऋतु दीदी ने संबोधित करते हुए गुरू को समाज के लिए सन्मार्ग बताने वाला बताया। कार्यक्रम में बुजुर्गों का सम्मान किया गया।
जैन पंचायत के अध्यक्ष अनिल जैन अंचल ने कहा कि माता- पिता की देन की वजह है, वह संस्कारी हैं। आयोजन में विजय जैन, अमिताभ जैन, डा. श्वेता जैन, वीणा जैन, सरोज दिवाकर, सुरभि जैन, रेखा जैन, वंदना जैन, मुकेश जैन पाली, नरेंद्र जैन कडंकी, शैलेंद्र सागर आदि ने विचार रखे। मंगलाचरण की प्रस्तुति सुमन चौधरी ने दी। जैन पंचायत के महामंत्री डा. अक्षय टडैय़ा, प्रदीप सतरवांस, राजेंद्र जैन थनवारा, मोदी पंकज जैन, मनोज बबीना, प्रभात लागौन, कपूरचंद जैन लागौन, महेंद्र चौधरी, सत्येंद्र जैन गदयाना, अक्षय अलया, गैंदालाल सतभैया, जिनेंद्र जैन थनवारा, मीना इमलिया, जिनेंद्र जैन, विनोद कामरा आदि ने कवि चंद्रसेन भोपाल को प्रतीक चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।