कैप्सन - मिट्टी का होता अवैध खनन
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तालबेहट। जिस ऐतिहासिक भारतगढ़ दुर्ग को अंग्रेजों की आग उगलती तापें न हिला सकी आज उसके अस्तित्व पर खतरे के बादल मड़राने लगें हैं। पहले दफीना बाजों और अब अवैध खनन माफिया दुर्ग की तलहटी से खुलेआम अवैध रूप से मिट्टी का उठान कर रहें हैं। वही जिम्मेदार जानकारी के बाद मौन साधे हुए हैं।
इस समय पूरे क्षेत्र में अवैध खनन का कारोबार व्यापक स्तर पर फलफूल रहा हैं। सरकारी भूमि और नदी, नालों के किनारे स्थित गरीबों की जमीनों के बाद अब खनन माफिया जहां मन होता है, वही से खुले आम अवैध खनन करना शुरू कर देतें हैं। कुछ दिनों से नगर के ऐतिहासिक भारत गढ़ दुर्ग की समीप कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ की खातिर अवैध रूप से मिट्टी का उठान शुरू कर दिया। इससे दुर्ग के अस्तित्व पर संकट के बादल मंड़राने लगें हैं। बताते चले कि इससे पहले कुछ दफीना बाजों ने धन की लालच में दुर्ग के अंदर व्यापक स्तर पर रातों रात खनन कराया था। जनता के विरोध के बाद उस पर रोक लगाई गई थी और अब कुछ लोग दुर्ग के समीप की जमीन को अपने लिए आवासीय जमीन बनाने की कवायद में दुर्ग के नीचे पुरातत्व विभाग के नियमों को नजर अंदाज करते हुए अवैध रूप से मिट्टी का उठान करवा रहें हैं। वहीं, दुर्ग के समीप मकान निर्माण करने पर निर्माण कर्ता को नोटिस थमाने वाले पुरातत्व विभाग के कर्मचारी इसकी जानकारी के बाद मौन साधे हुए हैं। जानकारी के बाद उपजिलाधिकारी अनिल यादव ने पिछलें दिनों यहां दबिश देकर अवैध खनन कराने वाले एक युवक की जमकर क्लास ली थी।
- फिर से अवैध खनन की जानकारी नहीं मिली है। मैं पूरी जानकारी करता हूं। किसी भी सूरत में अवैध खनन नहीं होने दिया जाएगा।
- अनिल कुमार, उपजिलाधिकारी तालबेहट।