कलौथरा (ललितपुर)। तहसील पाली क्षेत्र में भी उड़द व सोयाबीन की फसल में इल्ली का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। यहां पर ग्राम कलौथरा, सिंगेपुर, सतौरा, कलरव समेत कई ग्रामों में फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गईं है। कीटनाशक दवाएं भी बढ़ती इल्लियों के प्रभाव को नष्ट नहीं कर पा रहीं हैं। किसानों ने शासन से नष्ट फसल का सर्वे करवाकर मुआवजा दिलाए जाने की मांग की है।
इस वर्ष किसानों ने कर्ज उड़द व सोयाबीन की फसल की बुवाई कर पैदावार अच्छी होने की उम्मीद लगा रहे थे, लेकिन खरीफ की फसल में उड़द व सोयाबीन में पहले पीला मोजेक रोग लग गया, कीटनाशक के छिड़काव से 50 प्रतिशत फसलें बच गईं पर अब इल्ली का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। दो बार कीटनाशक दवा का प्रयोग किया, लेकिन इल्ली नष्ट नहीं हो रही है। कुछ गांव में तो फसलें साफ हो गईं हैं। अब किसान नष्ट फसल का सर्वे कराकर नुकसान का मुआवजा दिलाए जाने की आस लगाए बैठे हैं।
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चार एकड़ की जमीन में उड़द की खेती की थी, जिसमें बीज व दवाइयों समेत लगभग तीस हजार की लागत आई थी। इल्ली लगने से फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई। कैलाश नारायण, सिंगेपुर
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उड़द की फसल में पीला मोजेक रोग लगने से 50 प्रतिशत नुकसान पहले ही हो गया है। बची फसल को इल्ली के प्रकोप ने बर्बाद कर दिया है। मुरारीलाल दुबे, सतौरा
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लगभग दस एकड़ की जमीन में उड़द व सोयाबीन की बुवाई की थी। इल्ली लग गई है, इसे नष्ट करने के लिए दो बार दवाइयों का प्रयोग किया, लेकिन नष्ट नहीं हो रही है। कुंदन सिंह यादव, कलौथरा
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खरीफ फसल में पीला मोजेक रोग से दवा डालने पर राहत मिली, लेकिन अब इल्ली लगने से फसलों को अधिक नुकसान पहुंचा है। राजाभैया बुंदेला, कलरव
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मौसम में कभी धूप कभी बारिश से इल्ली की समस्या आ रही है। किसान फली छेदक कीट नियंत्रण के लिए नीम का तेल एक लीटर प्रति हेक्टेयर या इमामेक्टीन बेंझोयट पांच एसजी 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करें।
डॉ. नितिन कुमार, कृषि वैज्ञानिक
उड़द की फसल हुई नष्ट- फोटो : LALITPUR