ललितपुर। आचार्य सौरभसागर महाराज ने कहा कि तीर्थ हमारी संस्कृति की अमूल्य धरोहर हैं, ये हमारी आस्था के केंद्र हैं। प्राचीन तीर्थ से ही समाज और संस्कृति की पहचान है। इनका संरक्षण और संवर्द्धन करना प्रत्येक व्यक्ति की नैतिक जिम्मेदारी है। ये पावन क्षेत्र हमारी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक पहचान हैं, हमारी अमूल्य विरासत हैं।
आचार्य ने कहा कि सम्मेद शिखर शाश्वत जैन सिद्धक्षेत्र है, प्रत्येक श्रद्धालु के रग-रग में सम्मेद शिखर बसता है। उसकी पावनता, पवित्रता से छेड़छाड़ कतई स्वीकार नहीं है। इस पावन क्षेत्र के संरक्षण का अभियान तब तक जारी रहना चाहिए जब तक सरकार लिखित में इसके बारे में सूचित नहीं करता है। सम्मेद शिखर कोई मौज-मस्ती का स्थान नहीं है, ये क्षेत्र हमारे जीवन को पवित्र करते हैं। इनकी प्राचीनता, पवित्रता, ऐतिहासिकता पुरातत्वता युगों- युगों तक बनी रहनी चाहिए। नवीन खोज नवागढ़ में स्थित जैन पहाड़ी के निकट प्राकृतिक पाषाण आसान का अन्वेषण क्षेत्र संयोजक विमल जैन ने किया। आचार्य सौरभ सागर महाराज ने ध्यान साधना करके बताया यहां की ऊर्जा विलक्षण है, यहां पूर्वाचार्यों की निरंतर साधना से उत्कीर्ण पुण्य वर्गनायों से यह स्थल विशेष रूप से साधना योग्य हो गया है।
सम्मेद शिखर के संरक्षण को नवागढ़ में हुआ मंडल विधान
आचार्य सौरभ सागर महाराज, मुनि विनंद सागर महाराज, मुनि विनत सागर महाराज के सान्निध्य में महरौनी विकासखंड में सौजना के पास स्थित प्रागैतिहासिक दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र नवागढ़ में शाश्वत जैन सिद्धक्षेत्र सम्मेद शिखर के लिए सम्मेद शिखर विधान का आयोजन ब्रह्मचारी जय कुमार निशांत के निर्देशन में श्रद्धा पूर्वक संपन्न हुआ। सर्वप्रथम मंगलाष्टक, अभिषेक, शांतिधारा व सकलीकरण की क्रिया विधि विधान के साथ की गई। सम्मेद शिखर विधान में श्रद्धा भक्ति और सम्मेद शिखर जी पर आए संकट के जल्द निवारण की भावना से विधान के मंडल पर मंत्रोच्चार पूर्वक अर्घ्य समर्पित किए। विधान एवं वात्सल्य प्रतिभोज का पुण्यार्जन सेठ कपूरचंद, जितेंद्र आशीष जैन गौना वाले मड़ावरा परिवार ने किया।
फरवरी में होगा नवागढ़ महोत्सव, बैठक में लिया निर्णय
नवागढ़ क्षेत्र कमेटी के प्रचारमंत्री डॉ. सुनील संचय ने बताया कि नवागढ़ क्षेत्र कमेटी की कार्यकारिणी की बैठक में निर्णय लिया कि 23 व 24 फरवरी को दो दिवसीय नवागढ़ महोत्सव आचार्य विशुद्ध सागर महाराज ससंघ के सानिध्य में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा नवीन कार्यकारणी गठन पर विचार-विमर्श किया गया। विधान के बाद आचार्य सौरभसागर महाराज का पद विहार नवागढ़ से अतिशय क्षेत्र पपौरा के लिए हो गया, रात्रि विश्राम ग्राम-अजनौर जिला टीकमगढ़, ग्राम-सापोन से 1.5 किमी आगे होगा। क्षेत्र कमेटी के वीरचंद्र जैन, अशोक जैन, योगेंद्र जैन आदि ने आभार व्यक्त किया।