ललितपुर। मृत प्राय हो चुकी करीब पंद्रह किलोमीटर लंबी बानई नदी को एक बार फिर नया जीवन मिला है। गांव अनौरा तक यह नदी में पानी बहना शुरू हो गया है। इसके पानी से किसानों ने वर्षों बाद रबी की फसल की सिंचाई भी की है।
विकास खंड बिरधा की गांव खितवांस और सतरवांस से बानई नदी निकली थी। यह नदी तालगांव, अनौरा, झरकौन, कल्यानपुरा, कचनौंदा होते हुए कचनौंदा बांध में जाकर मिल जाती है। करीब 15 किलोमीटर लंबी नदी का छह किलोमीटर का हिस्सा देखरेख के अभाव में स्वरूप खो चुका था।
इस विलुप्त हुए छह किलोमीटर के हिस्से को पुर्नजीवन देने के लिए एक वर्ष पूर्व जिलाधिकारी ने मनरेगा के तहत काम करने के निर्देश दिए थे। मनरेगा के तहत नदी के बेड को समतल किया और दोनों पाटों पर मिट्टी चढ़ाकर नदी का स्वरूप प्रदान किया गया। नदी के छह किलोमीटर के क्षतिग्रस्त भाग में से चार किलोमीटर का काम पूर्ण हुआ। इसका नतीजा यह निकला कि नदी बरसात के दिन में तो लबालब रही ही, सर्दी के मौसम में भी इसमें पानी रहा।
जिससे रबी के सीजन में ग्राम अनौरा, तालगांव के ग्रामीणों ने अपनी फसल की सिंचाई के लिए इस नदी के पानी का उपयोग किया। बृहस्पतिवार को ग्राम अनौरा में बानई नदी पुर्नजीवन को लेकर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें जिलाधिकारी आलोक सिंह ने मनरेगा से बानई नदी में बनाए गए पुल निर्माण, चेकडेम, नदी का गहरीकरण, पौधरोपण एवं सड़क निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। इसके साथ शेष बचे दो किलोमीटर जोकि ग्राम तालगांव, झरकौन और कल्यानपुरा में है उसे मार्च 2023 तक पूर्ण करने का निर्देश दिया। इसके बाद चौपाल में डीएम ने ग्रामीणों की समस्या सुनी। साथ में यहा नवनिर्मित गोशाला का निरीक्षण भी किया। इस दौरान सीडीओ अनिल कुमार पांडेय, डीसी मनरेगा रवींद्रवीर यादव, उप निदेशक कृषि संतोष कुमार सविता, बीडीओ बिरधा संदीप मिश्रा, एपीओ उमेश कुमार झां, वासुदेव मौजूद रहे।
105 हेक्टेयर बंजर भूमि की होगी सिंचाई
नदी की 15 किलोमीटर लंबी है। नदी पर तीन चेकडैम बनाए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत अनौरा, तालगांव, झरकौन एवं कचनौदाकलां में करीब 9440 जनसंख्या निवास करती है और 3256.46 हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है। नदी के जीर्णोद्धार से इन ग्राम पंचायतों की 105.65 हेक्टेयर बंजर भूमि को पानी उपलब्ध होगा और उस पर खेती की जा सकेगी।