पाली (ललितपुर)। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ करने के दावे कर रही है, लेकिन जिले की प्रमुख तहसील पाली में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 12 साल से चौरसिया समाज की धर्मशाला में चल रहा है। यहां बने चार कमरों में ओपीडी, पंजीयन केंद्र, दवा वितरण केंद्र और स्टोर है। रोज करीब 300 मरीज यहां इलाज को पहुंचते हैं, लेकिन व्यवस्थाएं न होने से ठीक से उपचार नहीं मिल पाता। गंभीर मरीजों को भर्ती कर प्राथमिक उपचार देने की बजाय उनको सीधे रेफर कर दिया जाता है।
पाली तहसील और नगर पंचायत क्षेत्र में 2010 में चौरसिया धर्मशाला में स्वास्थ्य विभाग ने दो बेड का अस्थायी अस्पताल शुरू कराया गया था। यहां पर कस्बा पाली, राजगढ़, राधापुर, बछलापुर, पडना, मडना, सिमरधा, खाईखेरा, कैथोरा, ठगारी, कनपुरा समेत करीब 20 गांव के 300 लोग रोज इलाज को आते हैं।
लेकिन अस्पताल में अव्यवस्थाओं का बोलबाला है। अस्पताल में स्टाफ की भी कमी है। यहां पर महज एक डॉक्टर और वार्ड ब्वॉय की तैनाती है। ऐसे में मरीजों को इलाज के लिए भी लंबा इंतजार करना पड़ता है। सफाईकर्मी नहीं होने से अस्पताल में गंदगी रहती है।
शासन को भेजा गया प्रस्ताव
धर्मशाला में चल रहे अस्पताल को स्थायी भवन देने के लिए तहसील प्रशासन ने जमीन ढूंढ ली है। अगस्त 2021 में सीओ कार्यालय के सामने ढाई हेक्टेयर जमीन चिह्नित कर शासन को प्रस्ताव भेजा है। अफसरों का कहना है कि अस्पताल निर्माण के लिए शासन की अनुमति का इंतजार है।
अस्पताल में इलाज के लिए अधिक मरीज आते हैं। एक चिकित्सक होने से अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है। स्थायी अस्पताल संचालित किया जाए। - खेमचंद, बछलापुर
अस्पताल में पानी और शौचालय की समस्या बनी हुई है। यहां पर सुविधाओं के लिए विभाग को पहल करनी चाहिए। पीने के लिए पानी की सुविधा कराई जाए। - बेनीबाई
एक चिकित्सक होने से इलाज के लिए घंटों तक बैठना पड़ता है। पर्याप्त मात्रा में स्टाफ की तैनाती की जाए। ताकि लोगों को राहत मिल सके। - पुष्पा
अस्पताल में अव्यवस्थाओं का अंबार है। मरीजों को उपचार के साथ अन्य सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएं। जिससे परेशान न होना पड़े। - चतरे, राधापुर
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लोगों की मांग पर चौरसिया धर्मशाला में संचालित किया जा रहा है। अस्पताल के लिए नया स्थान चिह्नित कर लिया गया है। इसके लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए नगर पंचायत के अधिकारी से बात कर की जाएगी। - डॉ. जेएस बक्शी, प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधिकारी