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पूरी नहीं हुई सस्ती दवा मिलने की आस, मरीज हो रहे उदास

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ललितपुर। सरकार ने लोगों को सस्ते दामों में दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र खोले हैं, लेकिन जिले में इन केंद्रों पर दवाइयां ही नहीं हैं। आलम यह है कि मरीजों को दवाएं नहीं मिलने पर मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। साथ ही बाजार से महंगे दामों पर दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
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केंद्र सरकार द्वारा मरीजों को सस्ती दरों में दवा उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि योजना चलाई गई है। इसके अंतर्गत जिला अस्पताल में इकलौता प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र संचालित किया गया है। केंद्र पर लगभग 600 प्रकार की दवाइयां और 50 प्रकार के उत्पाद मिलते हैं, जो लगभग 50 से 70 प्रतिशत तक सस्ते दाम में मिलते हैं।
लेकिन अब जन औषधि केंद्र दवाइयों की कमी से जूझ रहे हैं। हालत यह है कि तीन माह पूर्व दवाइयों का ऑर्डर लगाया गया था, लेकिन अब तक दवाइयां उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। वर्तमान में केंद्र की स्थिति यह है कि लगभग डेढ़ माह से केंद्र पर महज 20 फीसदी दवाइयां ही रह गई हैं। आलम यह है कि केंद्र बंद होने की स्थिति में आ गए हैं।
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केंद्र पर मरीज सस्ती दवा की उम्मीद लेकर पहुंच रहे हैं। जब केंद्र पर दवा की पर्ची देते ही न होती है, तो वे मायूस होकर लौट जाते हैं। इनमें सबसे अधिक समस्या निर्धन तबके के मरीजों को हो रही है। बाद में मजबूरी में बाहर से मंहगी दवा खरीदनी पड़ रही है।
बीपी और शुगर की दवा तक नहीं मिल रही
प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र से सबसे अधिक रक्तचाप, मधुमेह और प्रतिरोधक क्षमता वाली दवा की बिक्री होती है। पर अब सामान्य दवाओं की भी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसे में लोगों को मंहगी दवाइयां खरीदनी पड़ रही है। ऐसे में मरीज आए दिन चक्कर काट रहे हैं।
केंद्र पर दवाइयों की मांग लगभग तीन माह पूर्व कर दी गई थी, लेकिन आपूर्ति धीमी गति से हो रही है। मार्च के पहले सप्ताह में पूरी दवाइयों की आपूर्ति हो जाएगी।
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- दीपचंद्र कुशवाहा, संचालक, प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र
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