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हिन्दी लेखन को बढ़ावा देने पर जोर

Thu, 15 Sep 2016 01:01 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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hindi days, lalitpur news - फोटो : amar ujala, lalitpur news
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ललितपुर। हिन्दी दिवस पर विभिन्न संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान हिंगलिश शब्दों के प्रचलन को हिन्दी के विकास में बाधक बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को हिन्दी का ज्ञान कराना उतना ही आवश्यक है जितना कि अंग्रेजी का। उन्होंने हिंदी लेखन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।  
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पुलिस लाइन स्थित मुक्तिधाम मंदिर में बुधवासरीय सत्संग समिति के आयोजन की 17वीं वर्षगांठ एवं हिन्दी दिवस समारोह पूर्वक मनाया गया। संस्कृत विभागाध्यक्ष डा. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि संत तुलसी, कबीर, रहीम, सूरदास आदि महाकवियों ने अपनी हिन्दी में रचित रचनाओं के माध्यम से हिन्दी को जन-जन की भाषा बनाया। संस्कृताचार्य पं. देवकान्त झा ने कहा कि प्रारम्भ से ही भौतिक सिंहासनों की चकाचौंध से दूर रहकर हिन्दी ने राष्ट्रभाषा का गौरव पाया है। शिक्षाविद अवध बिहारी कौशिक ने कहा कि परमात्मा को प्राप्त करने के लिये महर्षियों ने धर्मशास्त्र में चार मार्ग बताए हैं। डा. जनक किशोरी शर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षा एवं संस्कारों को सर्वाधिक महत्व दिया गया है। 

 डा. रतनलाल शर्मा ने कहा कि भारत देश में वेदव्यास, बाल्मीकि, गौतम बुद्ध, महावीर स्वामी, शंकराचार्य, गोस्वामी तुलसीदास, राष्ट्रपिता गांधी जैसे महान संतों ने भारतीय संस्कृति को संबल प्रदान किया। राष्ट्रपति पुरस्कृत रूपनारायण निरंजन ने कहा कि भारत विविध संस्कृतियों को अपने आप में समाहित किए हुए हैं। 
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इस अवसर पर नर्वदा प्रसाद वर्मा, अधिवक्ता राजेष दुबे, उमाकान्त गुप्ता, डा. रतनलाल शर्मा, लखनलाल त्रिपाठी, इं.राजाराम गोस्वामी, छाया त्रिवेदी, दमयन्ती, डा. जनक किशोरी शर्मा, मेहरबान सिंह,  डा. रामकुमार रिछारिया,  सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, जर्नादन पांडेय आदि उपस्थित रहे। संचालन अवध बिहारी कौशिक ने किया। अंत में देवकान्त झा ने सभी का आभार व्यक्त किया। 

सोसायटी फार लीगल एण्ड ऐजूकेशन राइट्स ने हिंदी हमारी मातृभाषा है मात्र एक भाषा नहीं विषय पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की। इस दौरान संस्था सचिव अनुराग चतुर्वेदी,  अखिलेश बबेले, हेमलता साहू, प्रीति शुक्ला, विनीता पाठक आदि उपस्थित रहे। केपीएस डिग्री कालेज ककरुआ में आयोजित संगोष्ठी में हिंदी में उत्पन्न हो रहे अशुद्घ लेखन पर गहरी चिंता व्यक्त की गई। डा. जनक किशोरी शर्मा, अखिलेश कुुमार, डा. जितेंद्र राजपूत व प्राचार्य डा. कपिल श्रृंगीऋषि ने अपने विचार रखे। श्री दीपचंद्र चौधरी महाविद्यालय में आयोजित गोष्ठी में हिंदी की महत्ता पर प्रकाश डाला गया। मानद आचार्य भगवत नारायण शर्मा,  प्रबंधक कमलेश चौधरी, प्राचार्य डा. जेएस तोमर ने अपने विचार रखे। संचालन कामिनी जैन ने किया। सुदर्शन डिग्री कॉलेज में भी हिंदी दिवस मनाया गया। प्रबंधक उमा यादव ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान हिंदी की उपयोगिता पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर प्राचार्य के के सिंह, महेश कुमार झा, रामसेवक, कल्पना सिंह, विकास सोनी आदि उपस्थित रहे।

हिन्दी के माथे की बिंदी भीग न जाए पानी में...
साहित्यिक संस्था हिंदी, उर्दू, अदबी संगम ललितपुर एवं सहयोगी संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कवि सम्मेलन में साहित्यकारों, कवियों ने- हिन्दी के माथे की बिंदी भीग न जाए पानी में, शरीफों के चेहरों की उड़ने लगी हैं हवाईयां, मेरे दुश्मन के मुंह से जब मेरी तारीफ होती है, जैसी पंक्तियां की प्रस्तुति देकर माहौल पूर्ण रुप से हिंदी मय बना दिया।
कवि सम्मेलन में  रामकृष्ण कुुशवाहा, रामस्वरुप नामदेव, सोनिया प्रभाकरन,  श्यामलाल श्याम , मुस्कान स्वामी, रमेश पाठक, नारायण पटेल, शीलचंद जैन शरारती, शिखरचंद मुफलिस आदि ने कविताएं सुनाईं।  इस मौके पर दशरथ पटेल, गेंदालाल सतभैया, उत्कर्ष, रामप्रकाश शर्मा, अनुपमा अनुराग, विशाल, मनीष, कीर्ति, मनीष कुशवाहा, बसंत लारिया, सुरेंद्र लारिया, एमएल भटनागर, आदि उपस्थित रहे।
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