ललितपुर। सरकारी स्कूलों में आधा शिक्षा सत्र बीत चुका है, लेकिन बच्चों के हाथों में अब तक किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। वहीं कुछ ही दिनों में अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं कराने की तैयारी की जा रही है। ऐेसे में बिना किताबों के बच्चे कैसे परीक्षा में शामिल हो पाएंगे। विभाग के मुताबिक जिले के 244809 किताबें बच्चों को नहीं मिली हैं।
जनपद में कुल 1354 कंपोजिट और परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। 185000 छात्र पंजीकृत हैं। इन विद्यालयों के छात्रों को शासन की ओर से निशुल्क किताबें पढ़ाई करने के लिए वितरित की जाती हैं। सरकारी किताबों को स्कूलों में भेजने के लिए जैम पोर्टल के माध्यम से एक एजेंसी को अधिगृहित किया गया। अप्रैल माह में शिक्षा का नया सत्र चालू हो गया और आधा सितंबर माह गुजरने को है लेकिन अभी तक परिषदीय विद्यालयों के तीस फीसदी छात्रों को सरकारी किताबें पढ़ने के लिए उपलब्ध नहीं हो पाई है। सरकारी किताबें सप्लाई करने वाली एजेंसी ने अभी तक जनपद को 918652 किताबें ही भेजी हैं। जिसमें से 663843 किताबें ही छात्रों या स्कूलों तक पहुंच पाई हैं। इस प्रकार से अभी 244809 किताबें छात्रों तक पहुंचना शेष हैं। वहीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा की सुगबुगाहट शुरू हो चुकी है और छात्रों तक सरकारी किताबें नहीं पहुंच पाई हैँ। नौनिहाल परीक्षा की तैयारी कैैसे करें, जब उनको किताबें ही अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाई है।
पुरानी किताबें से पढ़ने का मजबूर
इस शैक्षिक सत्र में अभी तक सरकारी किताबें छात्रों को नहीं मिलने के चलते नौनिहाल पुराने सत्र की किताबों से पढ़ाई करने को मजबूर हो रहे हैं। इस सबंध में शिक्षा विभाग के कुछ कर्मचारियों ने बताया कि नई सरकारी किताबें अब तक न आने के चलते वह भी नौनिहालों को पुराने सत्र की किताबों से पढ़ा रहे हैं।
नए व पुराने कोर्स के चक्कर में फंसे छात्र
इस वर्ष परिषदीय विद्यालयों की कुछ कक्षाओं का कोर्स बदल चुका है और छात्रों ने पुराने कोर्स की किताबों से पढ़ाई की है। अब सितंबर माह में छात्रों को नया कोर्स मिल रहा है तो वह असमंजस में हैं कि उनकी अर्द्धवार्षिक परीक्षा किस कोर्स अंतर्गत कराई जाएगी।
कक्षा एक से आठ तक होती हैं इतनी किताबें
परिषदीय विद्यालय में कक्षा एक में एक, कक्षा दो में दो, कक्षा तीन, चार, पांच में करीब पांच-पांच किताबों का कोर्स होता है। वहीं कक्षा छह, सात, आठ में करीब 13-13 किताबों का कोर्स होता है।
जनपद के स्कूलों में इस सत्र की नई किताबें पहुंचाई जा चुकी है। जबकि कुछ विद्यालयों में किताबें अभी पहुंचना शेष है। इन विद्यालयों में किताबें जल्द से जल्द पहुंचाई जाएंगी। किताबों की सप्लाई देने वाली एजेंसी को भी जनपद के कोटे की किताबें पहुंचाने को लगातार पत्राचार किया जा रहा है।-रामप्रवेश, बेसिक शिक्षा अधिकारी