संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। जनपद में उच्च क्षमता के चार पारेषण उपकेंद्रों का निर्माण कराया जा रहा है। इसमें बंगरिया, महरौनी और मड़ावरा में बन रहे पारेषण केंद्रों का निर्माण कार्य गर्मियों तक पूरा हो जाएगा। जबकि तालबेहट में बन रहा 765 केवी का पारेषण केंद्र अगले वर्ष के अंत तक पूरा हो जाएगा। इससे जनपद के लगभग 50 हजार से अधिक उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के तहत जनपद में 1620 करोड़ रुपये की लागत से चार पारेषण उपकेंद्रों का निर्माण किया जा रहा है। जिले में अब तक महरौनी खुर्द में 10 व चीरा में 20 मेगावाट, महरौनी के ग्राम बारचौन और पठाविजयपुरा में 10-10 मेगावाट क्षमता के दो सोलर प्लांट के अलावा पठाविजयपुरा में 20 मेगावाट का एक और सोलर प्लांट बना हुआ है। वहीं, ग्राम खड़ोवरा में भी 10 मेगावाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट भी बनकर तैयार किया गया है। इनसे जनपद में लगभग 80 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। वहीं, तालबेहट क्षेत्र में भी 600 मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट भी बनाया जा रहा है। इससे जनपद में ग्रीन एजर्नी का हब बन जाएगा। तालबेहट के ग्राम बंदेसरा खांदी में 81 एकड़ जमीन पर 1400 करोड़ की लागत से 765 केवी क्षमता का उपकेंद्र बन रहा है। वहीं, ग्राम बंगरिया में 11 एकड़ जमीन पर 80 करोड़ रुपये की लागत से 220 केवी का पारेषण उपकेंद्र, महरौनी के ग्राम बैजनाथ में 40 करोड़ की लागत से 132 केवी पारेषण उपकेंद्र और मड़ावरा के ग्राम टीकरा में 220 केवी क्षमता का पारेषण उपकेंद्र सौ करोड़ की लागत से बनाया जा रहा है। ग्राम बंगरिया में उपकेंद्र का काम लगभग 75 फीसदी से अधिक हो चुका है। कल्यानपुरा से बंगरिया तक लाइन भी तैयार हो गई है और विभाग द्वारा इस लाइन का परीक्षण भी किया गया है। इस उपकेंद्र का संचालन मार्च 2026 तक होने की संभावना है।
वहीं, मड़ावरा में बन रहे पारेषण उपकेंद्र का निर्माण भी 70 फीसदी से अधिक हो चुका है। महरौनी में तेजी से काम चल रहा है और इसका काम भी गर्मियों तक पूरा होने की संभावना है। इनमें मड़ावरा पारेषण उपकेंद्र के लिए भी कल्यानपुरा से लाइन बनाई जा रही है। महरौनी को मड़ावरा पारेषण उपकेंद्र से जोड़ा जाएगा, जिसकी प्रक्रिया चल रही है। वहीं, तालबेहट में बन रहे पारेषण उपकेंद्र का काम लगभग 40 फीसदी तक हो गया है। इसके चलते इसका निर्माण कार्य अगले वर्ष के अंत तक होने की संभावना जताई गई है। एक पारेषण उपकेंद्र से लगभग 30 से 35 हजार उपभोक्ता लाभान्वित होंगे और लो-वोल्टेज की समस्या दूर हो जाएगी।