बुंदेलखंड पैकेज के तहत चल रही जखौरा-बिजरौठा ग्राम समूह पेयजल योजना के कार्यों में करोड़ों रुपये के घोटाले की आशंका पर शासन ने जांच बैठा दी है। इस योजना पर करीब 70 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। इसकी आकलन रिपोर्ट की दरों में हेरफेर को लेकर तत्कालीन अधिशासी अभियंता व सहायक अभियंता के बीच विवाद भी हुआ था। लखनऊ से आई जांच टीम ने बुधवार को दस्तावेज खंगाले।
बुंदेलखंड पैकेज के तहत केंद्र सरकार ने 2014-15 में जखौरा-बिजरौठा पेयजल योजना के लिए 70 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। योजना के तहत 14 गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, पाइप लाइन डालने आदि कार्य जल निगम करा रहा है। इसमें से सब स्टेशन, पंप प्लांट आदि का कार्य जल निगम की तकनीकी इकाई करा रही है। तकनीकी विभाग में योजना की आकलन रिपोर्ट के तहत दरों को लेकर तत्कालीन अधिशासी अभियंता एसपी सिंह व सहायक अभियंता बीडी साहू के बीच विवाद चल रहा था। अधिशासी अभियंता दरों को बढ़ाने का दबाव सहायक अभियंता पर बना रहे थे। इसको लेकर बीते 18 अप्रैल को दोनों के बीच मारपीट तक हो गई थी। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था। मामले की सूचना मिलने पर शासन जांच बैठा दी।
लखनऊ कार्यालय से मंगलवार को पहुंची जांच टीम में तीन अधिकारी, अधिशासी अभियंता आरआर सिंह, सहायक अभियंता सूर्यवली आनंद और जेई मो. खालिद शामिल हैं। टीम ने बुधवार को जल निगम कार्यालय पहुंचकर पेयजल योजना की फाइलें खंगाली। जांच टीम का नेतृत्व कर रहे अधिशासी अभियंता आरआर सिंह ने बताया है कि पेयजल योजना में हो रहे कार्यों को लेकर मिली शिकायत की जांच करने आए हैं। शिकायत में कितनी सच्चाई है यह जांच के बाद पता चलेगा।
इन बिंदुओं पर होनी चाहिए जांच
पेयजल योजना के तहत सात ग्राम पंचायतों में बनने वाले सात सब स्टेशन व पंप की कार्ययोजना शुरुआत से ही विवादों में रही है। जल निगम के तकनीकी विभाग ने वर्ष 2016 के अप्रैल माह में काम शुरू किया था। पंप प्लांट की लागत रिपोर्ट करीब 2.20 करोड़ की बनी। इसके बाद माह मई में पंप-मोटर की क्षमता में करीब दो तिहाई क्षमता कम कर दी गई थी। क्षमता में कमी के बाद दरों में भी कमी होनी थी, लेकिन तत्कालीन अधिशासी अभियंता एसपी सिंह के कार्यकाल में अक्तूबर में इसका टेंडर करीब 3.32 करोड़ में किया गया था। शिकायत मिलने पर उच्चाधिकारियों ने टेंडर निरस्त कर दिया था। यही टेंडर बीते मार्च में करीब 1.80 करोड़ रुपए में हुुआ है।
वहीं, पंप प्लांट के कार्य का टेंडर टू-बिट सिस्टम में किया गया था। इसमें टेंडर पेटी जिलाधिकारी के समक्ष खुलवाई गई थी। लेकिन, कार्य की दरों वाली फाइनेंशियल टेंडर पेटी अधिकारी ने अपने कार्यालय में ही गोपनीय तरीके से खुलवा ली थी। इसके अलावा शासन से स्वीकृत लागत रिपोर्ट में स्थानीय स्तर फेर बदल किया गया है। इसके लिए प्रदेश स्तरीय गठित सक्षम अथॉरिटी टीम से मंजूरी भी नहीं ली गई।
नियम विपरीत 50 लाख की सामग्री खरीदी
सूत्रों के अनुसार पेयजल योजना में जल निगम के अधिकारियों ने नियमों व शासन की शर्तों को ताक पर रखते हुए करीब 50 लाख रुपए का बंटरबांट कर लिया है। शासनादेश के तहत सब स्टेशन स्थापित होने के बाद वहां पर स्टेब्लाइजर लगाए जाने हैं, लेकिन, जल निगम के अधिकारियों ने नियम के विपरीत 50 लाख रुपए से लगभग 20 स्टेब्लाइजर खरीद लिए। जबकि, अभी तक सब स्टेशन तैयार भी नहीं हो पाए हैं।
जांच के बाद सब साफ हो जाएगा
पेयजल कार्ययोजना पर बिंदुवार और बारीकी से जांच की जाएगी। जो भी अनियमितताएं होंगी वह सामने आ जाएंगी। शिकायत के बाद जांच टीम यहां तहकीकात कर रही है।
- आरआर सिंह, अधिशासी अभियंता लखनऊ , जांच टीम अधिकारी।