ललितपुर। रविवार की सुबह एक कबाड़ी की दुकान पर परिषदीय स्कूल की सरकारी किताबें बिकती पाई गईँ। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर सरकारी किताबें भरकर लाई गई आटो और उसके चालक को पकड़ लिया और साथ ही चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
कोतवाली पुलिस के अनुसार रविवार की सुबह सूचना मिली कि सिविल लाइन स्थित चर्च के पास कबाड़ी की दुकान पर कुछ लोग सरकारी किताबें बेच रहे हैं। पुलिस मौके पर पहुंची, तो कबाड़ी की दुकान पर सत्र 2015-16 की सरकारी किताबें मिलीं। आटो चालक सहित पांच लोगों को गिरफ्तार कर कोतवाली लाया गया। पूछताछ में आटो चालक अभिषेक यादव पुत्र धर्मेंद्र यादव निवासी घुसयाना ने बताया कि उसके पास रविवार सुबह एक फोन आया और फोन करने वाले ने बताया कि आदर्श विद्यालय के पास से उसे कुछ सामान ले जाना है। आटो चालक आदर्श विद्यालय पहुंचा और उसने अपनी हजारों किताबों को भर लिया। फोन करने वाले शख्स ने आटो चालक को बताया कि ये किताबें उसे सिविल लाइन चर्च के पास कबाड़ी की दुकान पर पहुंचानी हैं। आटो चालक व एक अन्य लड़का किताबें लेकर कबाड़ी की दुकान पर पहुंच गए। इतने में ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंच गई। कबाड़ा व्यापारी मौके से भाग गया। पुलिस ने आटो चालक अभिषेक यादव, धर्मेंद्र पुत्र कमल निवासी आजादपुरा व तीन कबाड़ियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
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दस दिन पहले भी बिकीं थी किताबें
कोतवाली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आटो चालक ने अभिषेक ने बताया कि वह दस दिन पहले भी आदर्श विद्यालय से कुछ किताबें लेकर कबाडी़ की दुकान पर पहुंचा चुका था, इसलिए वह पांच सौ रुपए में सौदा पक्का करके किताबें उठाने पहुंच गया। किताबों को रखने उतारने के लिए आजादपुरा निवासी धर्मेंद्र को दो सौ रुपए दिए गए। दोनों लोग किताबें लेकर कबाड़ी की दुकान पर पहुंचे ही थे, कि इतने में पुलिस आ गई।
-नई पुस्तक बांटी नहीं और पुरानी बेचीं जा रहीं
ललितपुर। इसी वर्ष बीते शिक्षा सत्र-2015-16 की सरकारी पुस्तकों को रद्दी में बेचने के मामले से पुस्तक वितरण की समूची प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। पुस्तकों के बंडल बेचने के पीछे कहीं स्कूलों के बोगस छात्रांकन को छिपाने का खेल तो नहीं है या फिर पकड़ी गई पुस्तकों का वितरण ही नहीं कराया गया है। इन प्रश्नों ने अफसरों की कार्यप्रणाली को संदिग्ध बना दिया है।
ललितपुर जनपद के परिषदीय स्कूलों की प्रदेश में साख है, जिसका आधार जिले के स्कूलों में अच्छा खासा छात्रांकन माना जाता है। वर्ष 2015-16 में जिले के 1049 प्राथमिक एवं 492 पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में करीब एक 01 लाख 98 हजार छात्रांकन था। इस हिसाब से मुख्यालय पर पुस्तकों की आपूर्ति की गई। वर्तमान शैक्षिक सत्र में नवीन पुस्तकों की आपूर्ति अभी नहीं हो सकी। इस स्थिति से निपटने के लिए पहले अफसरों ने स्कूली बच्चों से पुरानी पुस्तकें जमा कराई। उसके बाद कक्षानुसार बच्चों को उनका वितरण कराया। इसके बाद भी पुरानी पुस्तकों के बचने से कई सवाल खड़े हो गए हैं। या तो बोगस छात्रांकन के कारण जरूरत से ज्यादा पुस्तकों की आपूर्ति हो गई या फिर पुस्तकों का वास्तविक वितरण नहीं किया गया, जिससे तमाम पुस्तकें स्कूलों तक नहीं पहुंच सकीं। तत्कालीन मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक गंगासिंह राजपूत ने बीते माह में जिले के अधिक छात्रांकन पर अंगुलियां उठाई थी। उनका तर्क था कि मंडल में झांसी, जालौन बड़े जिले होने के बावजूद ललितपुर जिले में सबसे ज्यादा छात्रांकन समझ के परे है। निरीक्षण के समय भी स्कूलों में साठ प्रतिशत से ज्यादा बच्चे उपस्थित नहीं मिलते हैं। इसपर उन्होंने छात्रांकन का सत्यापन कराने का भी निर्णय लिया था, लेकिन उनके स्थानांतरण से मामला ठंडा पड़ गया। जानकारों का कहना है कि यदि विद्यालय वार छात्रांकन का सत्यापन किया जाए तो दूध का दूध और पानी अलग सामने नजर आ जाएंगे।
इस सत्र की पुस्तकों का वितरण अभी नहीं कराया गया है और वह सुरक्षित रखी हुई हैं। पकड़ी गई पुस्तकें गत सत्र की बताई गई है। जिसकी जांच वह खुद कर रहे हैं।
संतोष कुमार राय, बीएसए ललितपुर।