जिला मुख्यालय होने के चालीस साल बाद भी नगर के कई मुहल्लों में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था नहीं हो पाई है। यहां आज भी लोग हैंडपंप के भरोसे हैं। कई घरों में हैंडपंप तो लगे हैं लेकिन पठारी हिस्सा होने के चलते पानी नहीं निकल रहा है। ऐसे में लोगों को बैलगाड़ी और साइकिल से पानी ढोना पड़ रहा है। पूरे दिन लोग पानी की जुगाड़ में लगे रहते हैं। सर्दियों में जब ऐसे हालात हैं तो गर्मियों में क्या हाल होंगे। स्थिति बदतर होने के बावजूद प्रशासनिक अफसरों को होश नहीं आ रहा है। अभी भी जल संस्थान और जल निगम के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जबकि, नगरवासियों से जलकर वसूला जा रहा है।
शहर के सभी 26 वार्डों में स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के लिए वर्ष 1975 में पाइप लाइन बिछाई गई थी। इसी दौरान नगर पालिका का भी गठन किया गया था। चालीस वर्षों में शहरी क्षेत्र का काफी विकास व विस्तार हो गया। लेकिन, नए मुहल्लों व बस्तियों तक जल संस्थान द्वारा पेयजल पाइप लाइन का विस्तार नहीं किया गया। कई जगह क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को दुरुस्त भी नहीं किया गया। शहर की सीमा पर बसे नेहरू नगर में कुल 20 प्रतिशत क्षेत्र में ही पाइप लाइन डाली गई है। नेहरू नगर के वार्ड नंबर 06 के पार्षद विवेक दरौनियां ने बताया कि वार्ड में करीब चार हजार परिवार ऐसे हैं, जिनके घरों तक पाइप लाइन नहीं है।
इसी तरह नेहरू नगर के ही वार्ड नंबर चार में भी एक हजार परिवार आज भी अपने घरों में नलों के कनेक्शन की बाट जोह रहे हैं। दोनों वार्ड के करीब आठ हजार परिवार हैंडपंपों के भरोसे पर टिकी है।
ऐसे ही हालात वार्ड नंबर 15 के मुहल्ला घुसयाना व पिसनारी बाग के हैं। यहां का विकास होने के साथ घनी आबादी बस गई है। इस क्षेत्र के भी सैकड़ों परिवार ऐसे हैं, जिनके घरों से पाइप लाइन काफी दूूरी पर है। वहीं, कई घर ऐसे हैं जहां नलों का कनेक्शन तो है। लेकिन जलापूर्ति न होने से उन्हें हैंडपंपों तक भटकना पड़ता है। यह क्षेत्र अपर जोन होने से विभाग प्रेशर नहीं बन पाने की बात कहकर पल्ला झाड़ लेता है।
इन मुहल्लों में नहीं है पाइप लाइन
शहर के कई ऐसे मुहल्ले हैं जहां पानी की पाइप लाइन नहीं है। मुहल्ला घुसयाना, पिसनारी बाग, रामनगर, खिरकापुरा, विष्णुपुरा, रैयदासपुरा, पुरानी बजरिया, पठापुरा, चौकाबाग, गोविंद नगर, कर्माबाई नगर, रावतयाना, हरदीला, इलाइट क्षेत्र, बड़ापुरा में पेयजल की भारी समस्या है।
पाइप लाइन तो है पर आपूर्ति नहीं
पेयजल की समस्या केवल नई बसी बस्तियों में नहीं है। वार्ड नंबर एक शहर की सबसे बड़ी मलिन बस्ती है। इस वार्ड में रैदासपुरा, खिरकापुरा, विष्णुपुरा, नारायणपुरा व पठापुरा मुहल्ले आते हैं। वर्ष 1975 में यहां पर भी पाइप लाइन बिछाई गई थी। लेकिन अब तक पानी ही नहीं पहुंच पाया है। कुछ क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां एक दशक बाद भी पानी की एक बूंद तक नहीं पहुंची है। खिरकापुरा व विष्णुपुरा में पानी तभी आता है जब लोग जल संस्थान के चक्कर काटने शुरू करते हैं।
वार्ड नंबर एक में मुहल्ला पठापुरा पठारी क्षेत्र पर बसा है। यहां पर बोरिंग सफल न होने से करीब चार सौ परिवारों को बंद पड़ी जल संस्थान की पाइप लाइन के साथ-साथ हैंडपंप का भी सहारा नहीं है। यहां रहने वाली करीब 55 वर्षीय महिला उर्मिला यादव बताती हैं कि उनके घर के नल में पिछले आठ वर्ष से पानी नहीं पहुंचा है। 60 वर्षीय केशव साहू बताते है कि वर्षों से नलों में पानी नहीं आया, लेकिन पानी का भुगतान हर वर्ष करना पड़ता है। यही बात वार्ड नंबर एक के अन्य पुरुषों व महिलाओं ने कही है। विष्णुपुरा मोहल्ले की वृद्धा शांतिदेवी कहती हैं बुढ़ापा होने से उनकी हिम्मत नहीं है कि वह हैंडपंप से पानी ढो सकें। उन्होंने बताया कि नलों में पानी आने का इंतजार करते-करते वर्षों बीत गए हैं, कहीं ऐसा न हो कि इस इंतजार में पूरा जीवन ही बीत जाए।