संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। कोतवाली के गांव पड़वां में गुरुवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। पति-पत्नी की मौत ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया। वहीं, माता-पिता की मौत से पांच साल की अनामिका और आठ साल के देव का रो-रोकर बुरा हाल है। देव कोे तो उसके दादा-दादी ने समझा दिया है, लेकिन अनामिका के सवालों का जवाब उनके पास नहीं है। वह अपने दादा-दादी से रोते हुए पूछ रही...मेरे मम्मी-पापा नहीं मिल रहे हैं, उन्हें ढूंढकर लाओ। इस सवाल का जवाब दोनों के पास नहीं है। सिवाए काट खाने वाले घर को देखने को। जब अनामिका को कोई जवाब नहीं मिलता तो वह कमरों में अपने मम्मी-पापा को ढूंढती फिरती है। न मिलने पर एक कोने में बैठकर रोने लगती है।
तहसील महरौनी के ग्राम पड़वां में छह फरवरी को अनामिका की मां सोना कुशवाहा (25) ने घर के अंदर फंदे से लटककर जान दे दी थी। पत्नी की मौत को पति छुट्टन कुशवाहा (28) बर्दाश्त नहीं कर सके और उनकी भी हार्ट अटैक से मौत हो गई। दोनों के एक साथ दुनिया से चले जाने की बात तो बेटा देव समझ गया, लेकिन अनामिका को यह बात समझ में न आई। वह अपने मम्मी-पापा के दिखाई न देने पर उन्हें खोजती है। अपने दादा-दादी से आकर पूछती है कि मम्मी, पापा कहां हैं। जब कोई जवाब नहीं मिलता तो वह घर के कमरों में खोजती है। लेकिन कहीं जब वे दिखाई नहीं देते तो रोने लगती है। बुधवार रात को अनामिका को मम्मी पापा की फिर याद आई तो वह उनके पास जाने के लिए जिद करने लगी। परिजनों ने किसी प्रकार दिलासा देकर चुप कराया और सुला दिया। बृहस्पतिवार की सुबह से अनामिका फिर मम्मी पापा के पास जाने की जिद पर अड़ गई और रोने लगी। घर में मौजूद अन्य लोग उसे गोदी में उठाकर दुकान पर ले गए और टॉफी-बिस्कुट दिलया। कुछ देर बाद वह फिर मम्मी पापा को बुलाने और उनके पास जाने की जिद पर अड़ गई।
दिव्यांग बेटा नहीं कर रहा किसी से बात
आठ वर्षीय दिव्यांग पुत्र देव की हालत भी खराब है। माता-पिता की चिता को मुखाग्नि देने के बाद वह घर आया और गुससुम सा एक कोने में बैठ गया। वह किसी से कोई बात नहीं कर रहा है। परिजन उसे दिलासा दे रहे हैं।
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