संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। वर्ष 1974 में जनपद का गठन हुआ, लेकिन पांच दशक बाद भी यातायात व्यवस्था सुदृढ़ नहीं हो सकी। ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग दस रूटों पर अब तक न तो रोडवेज और न ही निजी बस सेवा है। लगभग एक सैकड़ा ग्राम पंचायतों के बाशिंदे बस सेवा से अछूते हैं। वहीं आठ रूटों पर दिन में एक ही बस चलने से लोग समस्या से जूझ रहे हैं। डग्गामार वाहनों से जान जोखिम में डालकर लोग यात्रा करने को मजबूर हैं।
अंतरराज्यीय व जिला मुख्यालय से विभिन्न तहसील, ब्लॉक व ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 130 निजी बसों को परमिट जारी किए गए हैं। इनमें कई बसें नहीं चल रही हैं। अधिकांश रूट पर दिन में एक या दो बसें ही चल रही हैं। कई मार्ग पर तो कोई बस ही नहीं है। हालात यह है कि कई मार्गों पर मुख्यालय आने के लिए ग्रामीणों को सुबह निकलना पड़ता है, तब वे दोपहर तक आ पाते हैं। साधन कम होने से बसों में सवारियां भूसे की तरह भरी जाती हैं, इससे बच्चों व महिलाओं को काफी दिक्कतें हो रही हैं। कई गांव के लोग आ तो जाते हैं, लेकिन शाम को बस न होने से मुख्यालय पर ही रुकना पड़ता है।
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कागजों में चल रहीं बसें, सड़कों से गायब
परिवहन विभाग ने परमिट जारी कर भले ही बसों के संचालित होने की गणना कर ली हो, लेकिन हकीकत कुछ और है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार यहां 130 बसों का संचालन हो रहा है, पर सड़क से कई बसें गायब हैं। कुछ बसें अपने निर्धारित रूट पर नहीं जा रही हैं। तय स्थान से आधी दूरी से ही वापस हो जा रही हैं। ऐसे में परमिट हाेने के बाद भी ग्रामीण बस सेवा से अछूते हैं।
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इस क्षेत्र में नहीं है बस की सुविधा
मड़ावरा-गिरार, मड़ावरा-सौजना, बिरधा-हिंगौरा-कैलगुवां, तालबेहट-शहजदाबांध से मथुरा होकर बार, उगरपुर-गेवरा से तालबेहट, माताटीला से तालबेहट होकर ललितपुर, ललितपुर-बंगरिया से पाली-बालाबेहट, महरौनी से सौजना, डोंगरा-गदौरा से भौंती आदि। इसके अलावा ललितपुर-बार-टीकमगढ़, बार-भावनी, ललितपुर-रमपुरा कठवर, बार-बानपुर, मड़ावरार से मदनपुर, ललितपुर-मड़ावरा से धौरी सागर, तालबेहट-जखौरा-ललितपुर, तालबेहट-जखौरा-राजघाट आदि रूट पर एक ही बस चल रही है।
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तीन वर्ष से ठप पड़ा ग्रामीण क्षेत्र में रोडवेज का संचालन
वर्ष 2015 में परिवहन निगम ने लोहिया ग्रामीण बस सेवा की 24 बसों का संचालन शुरू किया था, लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते धीरे-धीरे ये बसें बंद हो गईं। अब महज तीन बसों का संचालन हो रहा है, जो झांसी-ललितपुर के लिए चल रही हैं। तीन वर्ष से ग्रामीण क्षेत्रों में बसों का संचालन बंद हो गया है।
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फोटो- 10
कैप्सन- पवन रिछारिया
दिन में एक ही बस चलने से यातायात की समस्या बनी हुई है। बसों की संख्या को बढ़ाया जाए।-पवन रिछारिया
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फोटो- 11
कैप्सन- टिंकू साहू
बसों की कमी से डग्गामार वाहनों से सफर करना पड़ रहा है। ऐसे में समय पर गंतव्य नहीं पहुंच पाते हैं।
- टिंकू साहू
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वर्जन
ग्रामीण क्षेत्रों में बस संचालित करने के लिए मुख्यालय को पत्र भेजकर परमिट मांगी गई है। अनुमति मिलते ही बसों का संचालन किया जाएगा।
- संतोष कुमार, क्षेत्रीय प्रबंधक, रोडवेज डिपो झांसी
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वर्जन
निजी बसों को विभिन्न रूट पर परमिट जारी किए गए हैं। कई मार्गों पर एक-दो ही परमिट हैं। इससे बसों की कमी बनी है।
- मोहम्मद कय्यूम, एआरटीओ