संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बी-पैक्स थनवारा के गनगौरा गोदाम स्थित क्रय केंद्र पर गेहूं की खरीद में अनियमितता और करीब 55 लाख रुपये के गबन का मामला सामने आया है। इस संबंध में समिति सचिव राघवेंद्र सिंह चौहान के खिलाफ कोतवाली सदर में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। इस प्रकरण के सामने आने से सहकारी विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
अपर जिला सहकारी अधिकारी रवि सिंह ने बताया कि अपर जिलाधिकारी द्वारा राघवेंद्र सिंह चौहान को गेहूं क्रय केंद्र का प्रभारी नामित किया गया था। उन्हें किसानों से गेहूं खरीदकर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आरोप है कि उन्होंने बिना अनुमति सहकारी अमीन रज्जन लाल श्रीवास्तव को केंद्र प्रभारी बना दिया।
खाद्य एवं रसद विभाग के ऑनलाइन पोर्टल के अनुसार, केंद्र पर 73 किसानों से कुल 5719.50 क्विंटल गेहूं खरीदा गया, जबकि इसके सापेक्ष केवल 3648.53 क्विंटल गेहूं ही एफसीआई को दिया गया। शेष 2070.96 क्विंटल गेहूं न तो गोदाम में मिला और न ही एफसीआई को दिया गया।
मामले की जांच सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता के निर्देश पर अपर जिला सहकारी अधिकारी और जिला प्रबंधक पीसीएफ की संयुक्त टीम ने 12 जून 2025 को की थी। जांच के दौरान सचिव ने दावा किया कि शेष गेहूं 16 किसानों से मोबाइल के जरिये खरीदा गया है और उनके पास सुरक्षित रखा गया है, लेकिन यह दावा गलत पाया गया। न तो किसानों के पास गेहूं मिला और न ही गोदाम में कोई स्टॉक उपलब्ध था।
विभागीय अधिकारियों द्वारा कई बार नोटिस जारी कर शेष गेहूं जमा कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। गबन किए गए गेहूं की कीमत लगभग 55.87 लाख रुपये आंकी गई है।
अपर जिला सहकारी अधिकारी की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। सीओ सदर सुनील भारद्वाज ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
98 लाख का चना बीज घोटाला जांच तक सीमित
जनपद में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले वर्ष 2023 में कृषि विभाग द्वारा क्लस्टर योजना के तहत चना बीज वितरण में करीब 98 लाख रुपये के घोटाले का मामला उजागर हुआ था।
योजना के अंतर्गत एक हजार हेक्टेयर में चना उत्पादन के लिए 800 क्विंटल बीज वितरित किया जाना था, लेकिन जांच में भारी अनियमितताएं सामने आईं। कई किसानों को कागजों में ही बीज वितरण दिखाया गया, जबकि मौके पर फसल नहीं मिली। कुछ किसानों को बीज दिया ही नहीं गया, वहीं एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम पर वितरण दर्शाया गया।
इसके अलावा बिना सत्यापन के अनुदान राशि भी जारी कर दी गई। जांच में यह भी सामने आया कि चयनित 18 गांवों के स्थान पर 21 अन्य गांव जोड़ दिए गए, जबकि 11 गांवों को सूची से बाहर कर दिया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन जिलाधिकारी ने शासन को पत्र भेजा था, जिसके बाद तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने अगस्त 2024 में जांच भी की, लेकिन तब से मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है।