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उपवास आत्मा को शक्ति प्रदान करता-आर्यिका अंतरमति

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आर्यिका संघ से आर्शीर्वाद लेती हुए व्रती श्राविकाएं - फोटो : LALITPUR
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मड़ावरा। आर्यिका श्री अंतरमति माता ने कहा कि उपवास करने से ही संयम के पथ पर चलने का रास्ता खुल जाता है। उपवास कर्म निर्जरा का प्रमुख साधन है। उपवास आत्मा को शक्ति प्रदान करता है। अगर आत्मा को सुख हो तभी धर्म हो सकता है। कहा कि बुंदेलखंड की पवित्र माटी में जन्मे गणेश प्रसाद वर्णी ने शिक्षा की अलख जगाकर उसकी ज्योति देश में जलाई थी। वह बीसवीं शताब्दी के पूर्वाध में जैन समाज एवं बुंदेलखंड क्षेत्र में शिक्षा के प्रचारक-प्रसारक, निर्भीक, दृढ़निश्चयी, कुरीतियों के विरोधी, सामाजिक-सौहार्द के लिए अपना जीवन समर्पित कर देने वाले महापुरुष थे। वह रविवार को श्री महावीर विद्याबिहार परिसर में धर्मसभा को संबोधित कर रहीं थीं।
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वर्णीनगर में आचार्यश्री विद्यासागर महाराज की परम प्रभावक शिष्या प्रतिभा स्थली प्रणेता आर्यिका रत्न आदर्शमति माता की संघस्थ आर्यिकाश्री अंतरमति ससंघ के पावन सानिध्य में नगर में चातुर्मास का आयोजन किया जा रहा है। चातुर्मास समिति के महामंत्री डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि महरौनी नगर में आर्यिका रत्न विज्ञानमति माता चातुर्मासरत हैं। दशलक्षण पर्व के दौरान महरौनी में भी श्रावक संस्कार साधना शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें श्रावक, श्राविकाओं ने सोलह और दस दिनों का उपवास रखा। संयम व्रतियों ने रविवार को सामूहिक पूजन में आचार्य श्रेष्ठ का सुसज्जित अष्ट मंगल द्रव्य से पूजन आर्यिकाश्री अंतरमति माता से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस मौके पर 45 उपवासक व्रतियों का सम्मान दिगंबर जैन समाज मड़ावरा एवं चातुर्मास समिति के अध्यक्ष राजेंद्र व्यास, संतोष बजाज, सुमत मोदी, नीलेश जैन, प्रकाश सेठी, सुरेंद्र जैन, शनि सोंरया, राजीव सौंरया, शिखर चंद्र जैन, पंचम जैन, रानू जैन एवं जैन युवा जागृति सेवा संघ के सदस्यों ने किया। संचालन धर्मेंद्र सराफ, प्रदीप जैन ने किया।
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