ङोगरा खुर्द (ललितपुर)। तहसील पाली क्षेत्र अंतर्गत जामनी बांध से सटे कई गांवों के किसान खुद को छला हुआ महसूस करते हैं। उनका कहना है कि बिरधा माइनर का सर्वे होने के बाद इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसका खामियाजा सैकड़ों किसानों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। कई समर्थ किसान दो इंजन के सहारे खेतों में पानी पहुंचा रहे हैं, पर गरीब किसान मन मसोस कर रह जाते हैं। वर्षों पहले जब जामनी बांध का निर्माण हुआ था तो किसानों को सूखे खेतों में पानी पहुंचने की उम्मीद जाग गई थी. लेकिन वे उस समय नाउम्मीद हो गए जब बिरधा माइनर मूर्त रूप नहीं ले सकी। ग्राम पारोल, पटना, डोंगरा, दिगवार, तरावली, बरेजा, महाराजपुरा, मकरीपुर, ललितापुर, बछरई, झरावटा, बनयाना, सड़खरी, नयागांव, जमोरा, उमरिया गांवों में सिंचाई के पानी के लिए किसानों को परेशान होना पड़ता है। किसानों का कहना है कि लगभग चार दशक पहले लिफ्ट केनाल को सिंचाई विभाग ने बिरधा माइनर के नाम से सर्वे कराया था, जिसकी अब चर्चा भी नहीं होती है।
यहां पर डोंगरा, बरेजघा, तरावली, दिगवार, पटना, मछरका, पियारा आदि गांव तो बांध के बगल में होने के बाद भी सिंचाई के लिए पानी को तरस रहे हैं। यहां पर कुछ गांव के किसानों ने तो कर्ज लेकर ट्यूबवेल, कुुआं का निर्माण कराया है। इसमें पानी न निकलने से आर्थिक नुकसान हो गया है। ऐसे में कई किसान तो बर्बाद हो गए हैं। उन्हें दो किलोमीटर दूर से पानी लाकर सिंचाई करना पड़ रही है।
मक्षरका, पियारा, मोजा के पास से निकली माइनर से किसान दो पंप सैट चलाकर पांच हजार फीट पाइपों से पानी ला रहे हैं। ऐसे में अधिक मेहनत के साथ ही पैसा भी खर्च हो रहा है। इससे किसान कर्ज से नहीं उबर पा रहा है।
जबकि, किसान लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि जामनी बांध के भराव क्षेत्र से बरखेरा लिफ्ट केनाल बनाई जाए, जिसके हजारों हेक्टेयर जमीन पर सिंचाई हो सकेगी। चुनाव में जनप्रतिनिधियों ने वादे कर विरधा माइनर बनवाने का अश्वासन दिया। लेकिन सभी वादे खोखले साबित हुए। किसानों ने मांग की है कि जामनी बांध नहर व सजनाम की नहरें भैरा कुरोरा के पास 50 मीटर दूरी से निकलीं हैं, जिससे पानी उपयोग न होकर बर्बाद अधिक होता है। ऐसे में बिरधा माइनर बना दिया जाए।
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दो पंप सेट में नौ हजार फीट पाइप लाइन बिछाकर खेतों में पानी लातें हैं, चार सौ रुपया प्रति घंटा से पानी मिल रहा है, इसमें पैसा और समय ज्यादा दोनों लग रहे हैं।
- भस्सू कुशवाहा।
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खेतों की सिंचाई के लिए खेत में दो नलकूप बनवाए, लेकिन दोनों में पानी नहीं होने से सफल नहीं हुए तो अब कर्ज चुकाने की चिंता सता रही है।
- जगदीश कुमार
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मछरका मौजे के पास से नहर निकली है। यदि सिंचाई विभाग द्वारा गूल करवा दी जाए तो हजारों एकड़ जमीन सिचिंत हो जाएगी।
- रतीराम कुशवाहा
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हाल ही में पदभार संभाला है। माइनर के प्रस्ताव की जानकारी नहीं है। सहायक अभियंताओं के साथ बैठकर बिरधा माइनर के प्रस्ताव की जानकारी लेंगे। उसके बाद ही कुछ कह पाएंगे।
शरद कुमार
अधिशाषी अभियंता
सिंचाई खंड
पंपसेट से हो रही फसलों की सिंचाई- फोटो : LALITPUR