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Lalitpur News: बिजली मीटर किसी और का, अपने नाम बना लिया फर्जी बिल

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जीएसटी पंजीयन में फर्जीवाड़ा : जांच में पकड़ी गईं जिले में तीन सूटकेस फर्में
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टैक्स चोरी के लिए बिजली के फर्जी बिल को बनाया गया था आधार
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बिजली मीटर किसी और का था लेकिन फर्जी बिल लगाकर तीन फर्मों ने सेंट्रल जीएसटी में पंजीयन करा लिया। इतना ही नहीं, ई-वे बिल जारी कर लाखों रुपये कर (टैक्स) की चोरी भी कर ली। इसका खुलासा विभागीय सत्यापन में हुआ है। पता चला कि पंजीयन में जो जगह बताई गई, वहां पर कोई फर्म कार्य नहीं कर रही थी। वहां अन्य किसी व्यक्ति के मकान मिले हैं। ऐसी तीन सूटकेस फर्मों का खुलासा हुआ है। इन फर्मों ने कूटरचित कर दूसरों के बिजली बिल पर अपना नाम दर्ज करा लिया था।
पूरा प्रकरण संदेह के घेरे में तब आया, जब इन फर्मों से लाखों रुपये ई-वे बिल जारी किए गए। जीएसटी विभाग के अधिकारियों ने सोचा कि नई फर्म इतना उत्पादन कहां से कर सकती है। जीएसटी पंजीयन के लिए व्यापार स्थल का प्रमाण देना होता है। इसके लिए बिजली के बिल का सहारा जालसाजों ने लिया। दूसरों के घर के बाहर लगे मीटर का नंबर नोटकर कार्यालय से डुप्लीकेट बिल निकलवा लिया गया। फिर उसमें नाम बदलकर पंजीकरण के लिए जीएसटीएन की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया। इसके बाद उन्हें जीएसटी नंबर जारी हो गया।
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पंजीयन में जालसाजी का शिकायतें मिल रही थीं। राज्य कर विभाग के रडार पर जब ये तीनों फर्म आईं, तब जांच शुरू हुई। इन फर्मों ने इसी वित्तीय वर्ष में पंजीयन कराते हुए लाखों रुपये के ई-वे बिल जारी कर दिए। इतनी जल्दी इतना उत्पादन होना शक के दायरे में आ गया। जांच की गई तो तीनों फर्में के बिजली बिल फर्जी मिले। मीटर किसी और के नाम था लेकिन बिल में कूटरचित कर नाम बदल दिया गया। विभाग ने धोखाधड़ी व राजस्व चोरी की धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के लिए कोतवाली सदर में दो के खिलाफ और मड़ावरा थाने में एक फर्म के खिलाफ शिकायती पत्र दिया है।

केस - एक
एमके इंटरप्राइजेज मदनपुर रोड मड़ावरा के पते पर पंजीकृत कराई गई थी। यह फर्म सल्कानी रोड मंडी दीप निवासी मनोज के नाम पर थी। इसका पंजीयन आयरन, स्क्रैप के लिए कराया गया था। इस फर्म में बिजली बिल दूसरे किसी व्यक्ति का था, जो अपने नाम पर दर्शाया गया।

केस - दो
शहर के वार्ड नंबर छह में टाइल्स एवं ट्यूब निर्माण के लिए ताज इंटरप्राइजेज का पंजीयन कराया गया। यह फर्म मोहम्मद मोहसिन निवासी जसपुर, उधमसिंह नगर उत्तराखंड के नाम पर पंजीकृत थी। इस फर्म में भी किसी अन्य व्यक्ति का बिजली बिल अपने नाम पर दर्शाया गया था।

केस नंबर- तीन
ग्राम बमरौला में कृष्णा ट्रेडर्स के नाम से आयरन स्टील व्यापार के लिए फर्म का पंजीयन कराया गया। यह फर्म मथुरा के शुभम अग्रवाल के नाम है। इसमें भी फर्जी बिजली बिल का प्रयोग किया गया। इसमें बैंक एकाउंट भी फर्जी लगाया गया था।

क्या होती हैं सूटकेस फर्म
फर्जी दस्तावेज के सहारे पंजीकृत फर्म जो धरातल पर नहीं होती हैं लेकिन दस्तावेज में वह दिखाई देती हैं। कागजों में उत्पादन व सप्लाई का ब्योरा होता है, उन्हें सूटकेस फर्म कहते हैं। लंबी टैक्स चोरी के बाद इन्हें आसानी से पकड़ा नहीं जा सकता है क्योंकि धरातल पर कहीं इनका नामोनिशान नहीं होता है। इस प्रकार की फर्मों का उपयोग सरकारी सप्लाई और अन्य बड़ी जगहों पर फर्जी सप्लाई के लिए किया जाता है ताकि भुगतान में जीएसटी नंबर होने के कारण परेशानी न हो और बिना माल सप्लाई के भुगतान हो सके।
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वर्जन
जिले में रेकी अभियान के दौरान तीन फर्जी फर्म पकड़ी गई हैं। उनके व्यापार स्थल के लिए जो बिजली के बिल का उपयोग किया गया था, उस पते पर कोई फर्म नहीं मिली। बिल किसी और के नाम के निकले, जबकि पंजीयन के समय फर्म संचालक ने इस पर अपना नाम दर्शाया था। पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दे दी गई है। - हीरालाल जायसवाल, उपायुक्त राज्य कर विभाग ललितपुर
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