संवाद न्यूज एजेंसी सिलावन (ललितपुर)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महरौनी की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। यहां अल्ट्रासाउंड के लिए आने वाली महिलाओं की जांच ठेके पर कराई जा रही है। जबकि, सीएचसी में स्थापित अल्ट्रासाउंड मशीन वर्षों से धूल फांक रही है। सीएचसी पर हर माह 400 से 450 महिलाएं अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचती हैं। गर्भवती महिलाओं को तमाम परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है। महरौनी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही उपचार का एक मात्र सहारा है। यहां कस्बा के साथ सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के लोग आते हैं। लेकिन, यहां हर माह आने वाली 400 से 450 गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड निजी अस्पताल में ठेके पर कराया जा रहा है, जबकि यहां रखी अल्ट्रसाउंड मशीन वर्षों से धूल फांक रही है।
अल्ट्रासाउंड के लिए सीएचसी महरौनी पर माह की 1, 9, 16 और 23 तारीख को शिविर लगाया जाता है। शिविर में आने वाली गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण किया जाता है। रजिस्ट्रेशन के दौरान महिलाओं के मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आती है, जिसे लेकर उन्हें निजी अस्पताल पहुंचने पर बताना होता है। तब कहीं जाकर अल्ट्रासाउंड हो पाता है। इसके लिए सीएचसी महरौनी एक निश्चित धनराशि निजी अस्पताल को भुगतान करता है।
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