फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चिकित्सकों की मनमानी से मरीजों को नहीं मिल पा रहा उपचार

विज्ञापन
जिला महिला चिकित्सालय में सूनी पड़ी चिकित्सक की ओपीडी - फोटो : LALITPUR
विज्ञापन
ललितपुर। चिकित्सक हैं नहीं और शासन अप्रैल से मेडिकल कालेज खोलने का सपना देख रहा है। जिला महिला अस्पताल में गंभीर रोगियों का उपचार आयुर्वेद चिकित्सक कर रहे हैं। यहां सर्जनों की भी कमी है। अप्रैल में मेडिकल कॉलेज शुरू होना है, लेकिन चिकित्सकों की कमी के कारण यहां पर समस्याएं बनी हुई हैं। जिला महिला अस्पताल में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत भी गर्भवती महिलाओं को इलाज नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन

जिला महिला अस्पताल में प्रत्येक माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत विशेष जांच शिविर लगाया जाता है, जिसमें गंभीर गर्भवती महिलाओं की सभी प्रकार की जांच कराई जाती हैं और उपचार किया जाता है। नियमत: गंभीर गर्भवती महिलाओं का इलाज स्त्री रोग विशेषज्ञ द्वारा किया जाना चाहिए, लेकिन जिला महिला अस्पताल में महिलाओं को बेहतर उपचार नहीं मिल पा रहा है। दोपहर के समय तीनों ओपीडी में स्त्री रोग विशेषज्ञ मौजूद नहीं रहे। कक्षों में केवल आयुर्वेदिक चिकित्सकों द्वारा इलाज किया गया। ऐसे में कई मरीज स्त्री रोग विशेषज्ञ के आने का इंतजार करती रहीं। अंत में समय समाप्त होने पर बिना उपचार के ही वापस लौट गईं।
जिले में जागरूकता के अभाव में ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को आभास नहीं होता कि कौन चिकित्सक स्त्री रोग विशेषज्ञ है और कौन आयुर्वेदिक है। अधिकांश लोग गर्भवती महिलाओं का इलाज स्त्री रोग विशेषज्ञ से न कराकर आयुर्वेदिक चिकित्सक से करा लेते हैं। इसके बाद भी अधिकारी अनदेखा कर रहे हैं। जिसका खामियाजा आने वाले मरीजों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
विज्ञापन

जिला मुख्यालय पर स्थित जिला महिला अस्पताल प्रमुख अस्पतालों में से एक है। यहां पर जिले भर के अस्पतालों से प्रसव के अधिकांश गंभीर मरीज रेफर होकर आते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं अपनी जांच व प्रसव के लिए आती हैं। अस्पताल में 24 घंटे में लगभग दो दर्जन प्रसव होते हैं। लेकिन, 26 नवंबर से डा. गजेंद्र सिंह अवकाश पर चल रहे हैं। इससे अस्पताल में अल्ट्रासाउंड व्यवस्था गड़बड़ा गई है। सोमवार को दिन एक बजे के बाद जिला अस्पताल के चिकित्सक द्वारा अल्ट्रासाउंड किए गए, अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट मिलने तक चिकित्सक ओपीडी बंद करके जा चुके थे। ऐसे में मरीजों को दूसरे दिन आना पड़ रहा है, जबकि गर्भवती महिलाओं केे आवागमन में परेशानी होती है।
नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड (एनक्यूएस) की टीम के आने की सूचना पर अस्पताल को अच्छे अंक दिलाने के चक्कर में अस्पताल प्रबंधन सफाई पर जोर दे रहा है। इसको लेकर सोमवार को ओपीडी के समय में भी अस्पताल में सफाई जारी रही। इससे प्रसव कक्ष के बाद वार्ड में भर्ती मरीज व तीमारदारों को आवागमन में परेशानी रही।
अस्पताल में अल्ट्रासाउंड करने वाले चिकित्सक डा. गजेंद्र सिंह एक माह के अवकाश पर गए हैं। ऐसे में महिला मरीजों को अल्ट्रासाउंड की परेशानी हो रही है। जबकि, गर्भवती महिलाओं की अल्ट्रासाउंड के बिना जांच होना मुश्किल है। हालांकि सोमवार को जिला अस्पताल के चिकित्सक द्वारा एक बजे से अल्ट्रासाउंड महिला अस्पताल में शुरु किए। जब तक अल्ट्रासाउंड शुरु हुए तब तक अधिकांश चिकित्सका ओपीडी छोड़कर जा चुके थे। इससे गर्भवती महिलाओं को उपचार नहीं मिल सका है।
जिला महिला चिकित्सालय में ओपीडी में स्त्री रोग विशेषज्ञ के न बैठने से उपचार बाधित होने का मामला संज्ञान में आया है। इसकी जानकारी सीएमएस से ली जाएगी। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की समस्या चिकित्सक के अवकाश पर जाने से हो रही है, जिसका शीघ्र ही निराकरण किया जाएगा।
विज्ञापन

- डा. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें