संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। देवगढ़ को पर्यटन हब बनाने की तैयारी है। पुरातत्व विभाग इसका खाका तैयार कर रहा है। यहां स्थित किले, प्राचीन मंदिर आदि स्थलों का स्वरूप बदले बिना विकास कार्य कराने के लिए कंपनियों को आमंत्रित किया जा रहा है।
जिले की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक धरोहर के आधार पर इसे बुंदेलखंड का हृदय कहा जाता है। दक्षिण में विंध्याचल पर्वत की प्राकृतिक छटा, पश्चिम में बेतवा नदी, पूर्वी दिशा में जामनी सहित कई नदियां बहती हैं। यहां इतिहास के गर्भ में छिपे रहस्यों को उजागर करने वाले प्राचीन मंदिर, मूर्तियां व कलाकृतियां मौजूद हैं। इनमें सबसे ज्यादा आकर्षक देवगढ़ क्षेत्र माना जाता है। यहां मौजूद देव मूर्तियों के कारण इसे देवगढ़ यानि देवों के स्थान के नाम से जाना जाता है।
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देवगढ़ में तीन धर्मों का समागम
जनपद मुख्यालय से 33 किलोमीटर दूर बेतवा नदी किनारे एक ऊंची पहाड़ी पर बसा देवगढ़ त्रिधर्म आस्था का केंद्र है। यहां सनातनी संस्कृति का दशावतार मंदिर है। जैन धर्म के प्राचीन मंदिरों के साथ सर्वाधिक विश्व में ख्याति प्राप्त बौद्ध गुफाएं भी मौजूद हैं। यहां 31 जैन मंदिर हैं, साथ ही हजारों की संख्या में जैन प्रतिमाएं हैं। 18 मानस्तंभ एवं सैकड़ों अभिलेख उत्कीर्ण हैं। तीन प्रमुख घाटियां हैं, जिनमें सिद्धघाटी, राजघाटी एवं नाहरघाटी में गुप्तकालीन कला देखने को मिलती है। यहां 7वीं सदी का वराह मंदिर, कीर्तिगिरी दुर्ग के अवशेष भी दर्शनीय हैं। साथ ही कुंज द्वार, हाथी दरवाजा, पत्थर की बावड़ी, शिवमंदिर, सती स्तंभ, कुचदों कुरैयावीर व जैन मूर्तियों का अतुल भंडार है। यहां 9वीं सदी से लेकर 15वीं सदी तक की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण मंदिर हैं।
प्राचीन दशावतार मंदिर
देवगढ़ में गुप्तकालीन प्रतिमाओं में दशावतार मंदिर है। यह एक ऐसा देवालय है, जहां गुप्तकालीन श्रेष्ठ व कलात्मक प्रतिमाओं को देखा जा सकता है। देवगढ़ के इस मंदिर में प्रतिमा विज्ञान एवं शिल्प कला के दृष्टिकोण से तीन विशाल फलकों पर भव्य कलात्मक, सजीव मौलिक प्रतिमाएं मौजूद हैं। मंदिर के एक फलक पर नर-नारायण शिलाखंडों पर विराजमान हैं। मंदिर के दूसरे फलक पर श्रीमद्भागवत पुराण में वर्णित गजेंद्र मोक्ष की प्रतिमा का सुंदर छायांकन है। तीसरे फलक पर शेषशाही विष्णु भगवान की प्रतिमा है, जिसमें भगवान विष्णु शेषनाग के सहस्त्र फनों की छाया में विश्राम कर रहे हैं।
गुप्तकालीन शिल्पकला को प्रदर्शित करती हैं बौद्ध गुफाएं
कुछ वर्ष पूर्व विंध्याचल की पहाड़ियों में बौद्ध गुफाओं का पता चला। यहां गुप्तकाल की शिल्पकला का बेजोड़ प्रदर्शन है। इन बुद्ध गुफाओं ने देवगढ़ की पहचान विश्व के पर्यटन मानचित्र में दर्ज कर इस स्थान की अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई।
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पर्यटन विकास के लिए पीपीपी मॉडल पर सौंपने की तैयारी
पुरातत्व विभाग देवगढ़ को पीपीपी मॉडल पर कंपनी व ट्रस्ट को देने की तैयार कर रहा है। इसके प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ किए बिना विकास कराया जाएगा। साथ ही अपने अनुसार पर्यटकों को लुभाने के लिए लाइट व साउंड शो स्थापित करेंगे।
देवगढ़ को पीपीपी मॉडल पर देने के लिए शासन स्तर से पुरातत्व विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है।
मनोज यादव, सहायक पुरातत्व अधिकारी।