संवाद न्यूज एजेंसी
पाली। देश में आपातकाल के दौरान लोकतंत्र, संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र रक्षक सेनानी बालमुकुंद चौरसिया ने 93 वर्ष की उम्र में अपनी अंतिम सांस ली। नगर के मुक्तिधाम पर गार्ड ऑफ ऑनर देकर उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
लोकतंत्र रक्षक सेनानी बालमुकुंद चौरसिया का जन्म ललितपुर जिले के कस्बा पाली में 13 मार्च 1933 को हुआ था। अपने पिता की इकलौती संतान थे। आपातकाल के दौरान अपनी पत्नी व पांच छोटे बच्चों को घर में छोड़ लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपने साथियों के साथ घर से निकल पड़े और आपातकाल के दौरान जेल भी गए।
शुक्रवार को सुबह अचानक इनकी सांसें रुक गईं। जानकारी लगते ही कस्बे में शोक की लहर दौड़ गई। शाम पांच बजे के करीब इनके शरीर पर तिरंगा ध्वज लपेटकर मुक्तिधाम ले जाया गया। वहां पाली एसडीएम निशांत तिवारी, एसएचओ दीपक कुमार की मौजूदगी में गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया।
लोकतंत्र रक्षक सेनानी को श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में नगर पंचायत अध्यक्ष मनीष तिवारी, जिला पंचायत सदस्य अमर विश्वकर्मा, पूर्व चेयरमैन रामकुमार चौरसिया, चौरसिया समाज अध्यक्ष प्रशांत चौरसिया, पूर्व चौरसिया समाज अध्यक्ष नीरज राही आदि रहे। बालमुकुंद को लोग प्यार से बाली दादा कहते थे। भाजपा नेता चंद्रप्रकाश पंथ, भाजपा मंडल अध्यक्ष ब्रजेश राजूपत, अतुल जैन, पार्षद रानू दुबे, नदीम शबनम आदि श्रद्धांजलि दी।