ललितपुर। श्रीगुरु सिंह सभा के तत्वाधान में बृृृहस्पतिवार को वैशाखी का पर्व श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर 11 दिनों से चल रहे अखंड पाठ साहिबजी का समापन हो गया।
अखंड पाठ साहिबजी की सेवा मनिंदर सिंह मंगे, किरपाल सिंह परमार, रविंदर सिंह छतवाल परिवार की ओर से, निशान साहिबजी के चोले की सेवा सुरजीत सिंह सलूजा व सरनजीत कोर व सरदार ओंकार सिंह सलूजा परिवार की ओर से और लंगर की सेवा मनिंदर सिंह मंगे किरपाल सिंह, डॉ. जेएस बक्शी व पलविंदर सिंह परिवार की ओर से सेवा हुई। उज्जैन से पधारे रागी जत्था दिलप्रीत सिंह ने कहा कि खालसा पंथ की स्थापना सन 1699 ई में गुरु गोविंद सिंह ने आनंदपुर साहिब में पंज प्यारो की स्थापना करने से पहले की थी। उन्होंने सभा बुलाई इस सभा में उन्होंने पूछा कौन अपने सिर का बलिदान दे सकता है, इस बात को सुनते ही भीड़ में सन्नाटा छा गया। गुरप्रीत कौर ने कहा है कि तभी पहला हाथ आगे आया और वह हाथ भाई दया सिंह का था, तब गुरु गोविंद सिंह उन्हें तंबू के पीछे ले गए और जब थोड़ी देर बाद लौटे तो उनकी तलवार पर खून लगा हुआ था, इसके बाद धर्म सिंह, हिम्मत सिंह, मोहकम सिंह सिर कटवाने गुरुजी के साथ तंबू के पीछे चले गए। कुछ समय बाद गुरु गोविंद सिंह के साथ ठीक ठाक निकल कर बहार आए। अमृत कौर ने कहा कि इसके बाद सिख धर्म के हर पर्व की जिम्मेदारी उन्हीं पंज प्यारो को संौपी गई। सिख पंथ के हर पर्व पर श्रीगुरु ग्रंथ साहिबजी के आगे इन्हीं पंज प्यारो को जगह दी जाती है।
गुरु सिंह सभा के अध्यक्ष ओंकार सिंह सलूजा ने कहा कि गुरु गोविंद सिंह ने खडे बाटे में तैयार किए गए अमृत पान कराकर नाम के आगे सिंह की उपाधि से विभूषित किया एवं अमृतपान कराकर सिख पंथ की स्थापना की। वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरविंदर सिंह सलूजा ने कहा कि सिख धर्म की पहचान आज भी दुनिया में कायम है। जब देश विदेश में कहीं आपदा आती है तो सिख संगत दिल खोलकर लंगर प्रसाद भंडारे चलाती है एवं अस्पतालों में कैंसर, हृदय रोग, आंखों की दवाइयां इत्यादि वितरण करती है। इस मौके पर सरदार वीरेंदर सिंह, जितेंद्र सिंह सलूजा, मनिंदर सिंह मंगे, कृपाल सिंह, रविंदर सिंह छतवाल आदि को सरोपा भेंट कर सम्मानित किया गया।
ये लोग रहे मौजूद
ओंकार सिंह सलूजा, गुरमुख सिंह, पर्सन सिंह, परमजीत सिंह छतवाल, हरविंदर सिंह सलूजा, सुरजीत सिंह सलूजा, जितेंद्र सिंह सलूजा, चरणजीत सिंह, बलजीत सिंह, हरजीत सिंह, सुरजीत सिंह खालसा, गुरबीर सिंह, वीरेंद्र सिंह बीके, रविंद्र सिंह छतवाल, सतीश अरोरा, भगवत सिंधी, राजू सिंधी, मनजीत सिंह परमार, विकास सुरी, सुरेंद्र सिंह, मेजर सिंह परमार, गुरबचन सिंह बिलले, भूपेंद्र सिंह कृपाल सिंह, बिंदु कालरा, पूनम मालिक, अमरजीत कोर बक्शी, पूजा कालरा, गुरप्रीत कौर, मनप्रीत कौर, जसप्रीत कासैर, लवशीत सिंह अरोरा, मनमीत सिंह सलूजा, अमरजीत सिंह, अवतार सिंह आदि।