ललितपुर। दहेज में मोटरसाइकिल की मांग पूरी नहीं होने पर पत्नी को फांसी पर लटकाकर मारने के चार वर्ष पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट हरकेश कुमार की अदालत ने दहेज हत्यारोपी पति को दोषी पाया है। सजा सोमवार को सजा सुनाई जाएगी।
बिरधा पुलिस चौकी अंतर्गत ग्राम मैनवारा निवासी श्याम लाल पुत्र खरगा अहिरवार ने जाखलौन थाना में चार वर्ष पूर्व 26 फरवरी 2012 को तहरीर देकर बताया था कि उसने पुत्री उर्मिला की शादी जाखलौन थाना अंतर्गत ग्राम मैरतीकलां निवासी प्रेम सिंह के पुत्र चंद्रभान के साथ वर्ष 2007 में सम्मेलन में हिंदू रीति - रिवाज के साथ की थी।
शादी में उसने पुत्री के ससुराल पक्ष के सभी सदस्यों को कपड़े, सामान व दामाद को सोने की मोहर व 25 हजार रुपए आदि उपहार दिए थे। लेकिन, उसकी पुत्री के ससुर, प्रेमसिंह, देवर कैलाश व सास राजरानी सामान से संतुष्ट नहीं थे और वे उसकी पुत्री को मायके से मोटरसाइकिल लाकर देने के लिए गाली- गलौच और मारपीट कर प्रताड़ित करते थे।
पुत्री मायके आई तो उसने ससुरालीजनों द्वारा मोटरसाइकिल की मांग को लेकर मारपीट के बारे में बताया, लेकिन उसने पुत्री को समझा-बुझाकर वापस ससुराल भेज दिया।
घटना से चार माह पूर्व जब वह अपने पुत्र प्रमोद के साथ पुत्री को लिवाने गया तो चंद्रभान ने पुत्री को खेतों पर भेज दिया। इस पर उसका पुत्र जब चंद्रभान के साथ खेत पर पहुंचा तो यहां चंद्रभान ने उसके पुत्र प्रमोद के साथ गाली-गलौच करते हुए मारपीट की और उर्मिला को मायके नहीं भेजने की बात कहक वापस जाने को कहा।
इस पर उसने थाना जाखलौन में पुलिस में घटना की तहरीर दी। 14 फरवरी 2012 को उसकी पुत्री को बच्चा पैदा हुआ, तो वह सामान देने गया। 25 फरवरी 2012 को गांव के चौकीदार के लड़के का फोन आया कि उसकी पुत्री उर्मिला फांसी के फंदे पर लटकी है।
पिता की तहरीर पर थाना जाखलौन पुलिस ने पति चंद्रभान उर्फ चंदू, ससुर प्रेम सिंह, देवर कैलाश व सास राजरानी के खिलाफ दहेज हत्या, दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या एवं दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था।
शुक्रवार को अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रेक कोर्ट ने अभियोजन पक्ष द्वारा दी गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों को आधार मानते हुए मृतका उर्मिला के पति चंद्रभान को दहेज हत्या व दहेज प्रतिषेध अधिनियम के आरोप में दोषी पाया। जबकि, ससुर प्रेम सिंह, सास राजरानी व देवर कैलाश को संदेह का लाभ देते हुए आरोपों से बरी कर दिया। मामले की पैरवी सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बृजेंद्र सिंह यादव ने की।