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कोर्ट ने वापस लिया संजू राजा की हत्या का मुकदमा

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कोर्ट ने वापस लिया संजू राजा की हत्या का मुकदमा
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13 वर्ष पूर्व हुई थी तत्कालीन राज्यमंत्री के पुत्र की हत्या
राज्यपाल की संस्तुति को न्यायालय ने रखा यथावत
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। 13 वर्ष पूर्व हुए तत्कालीन राज्यमंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला उर्फ भगत राजा के पुत्र संजू राजा की बहुचर्चित हत्या के मामले में विचाराधीन मुकदमा पूर्व में की गई राज्यपाल की संस्तुति के बाद अब अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधियिम) मनोज कुमार शुक्ला की अदालत ने वापस ले लिया है। अदालत ने जयराम सिंह के गनर द्वारा उनकी सुरक्षा में गोलियां चलाना उसका कर्तव्य पालन माना है और उक्त हत्याकांड के मुकदमे को वापस ले लिया।
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सहायक शासकीय अधिवक्ता लखनलाल यादव के अनुसार विगत 13 वर्ष पूर्व 10 नवंबर 2005 को जनपद में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर अधिवक्ता जयराम सिंह यादव और तत्कालीन प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री वीरेंद्र सिंह बुंदेला के पुत्र संजय सिंह बुंदेला उर्फ संजू राजा व जयराम सिंह के पुत्र जोगेंद्र सिंह क्रमश: पूराकलां व जाखलौन सीट से सदस्य निर्वाचित हुए थे। जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर दोनों की अपनी-अपनी दावेदारी सामने आ रही थी। 10 नवंबर 2005 को सिविल लाइन निवासी वादी रामसिंह पुत्र रघुवीर सिंह ने थाना कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि उस दिन शाम के समय वह करीब 4.45 बजे सिलगन रेलवे क्रॉसिंग के पास पहुंचा, जहां फाटक बंद था। वह स्कॉर्पियो चला रहा था। इसमें संजय सिंह बुुंदेला, धर्मेंद्र प्रताप सिंह उर्फ डीपी राजा, बम्बू सोनी उर्फ बृजेश सवार थे। पीछे से सिविल लाइन निवासी जयराम सिंह यादव आए, उनके साथ उनकी पत्नी, गनर गजेंद्र राजा पुत्र जोगेंद्र सिंह व अन्य लोग थे। उन्होंने मेरी गाड़ी के बगल में गाड़ी रोक दी और घेरकर राइफल संजय सिंह बुुंदेला के सीने पर अड़ा दी और कहा कि उनके खिलाफ जिला पंचायत अध्यक्ष का चुनाव लड़ना चाहता है। जयराम सिंह ने मशीनगन से व सभी साथियों ने पिस्टलों से फायरिंग शुुरू कर दी, जिससे संजय सिंह व धर्मेंद्र प्रताप सिंह की मौके पर ही मौत हो गई और बम्बू सोनी उर्फ बृजेश सोनी को कई गोलियां लगीं थीं। जयराम सिंह को उन्हीं के साथियों की फायरिंग से चोटें आई थीं। वह किसी प्रकार छिपकर बचकर कोतवाली पहुंचा था। इस घटना से उस समय पूरे शहर में दहशत का माहौल छा गया था और पूरा बाजार यह खबर सुनते ही किसी अनहोनी की आशंका के चलते कुछ ही पलों में बंद हो गया था। उसने कोतवाली में बताया था कि घायल और मृतक मौके पर ही पड़े हैं। पुलिस ने रामसिंह की तहरीर पर जयराम सिंह यादव, जोगेंद्र सिंह गनर, जयराम सिंह के छोटे पुत्र व पत्नी, गजेंद्र राजा व तीन अन्य व्यक्तियों के खिलाफ धारा 147, 148, 149, 307, 302 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर लिया था। इस घटना में जयराम सिंह को गोलियां लगी थीं और उन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच प्राथमिक उपचार के बाद झांसी रिफर कर दिया था, इसके बाद झांसी से उन्हें ग्वालियर रेफर किया गया था। कुछ दिन बाद जयराम सिंह ने भी फैक्स के माध्यम से सूचना भेजकर थाना कोतवाली में अपनी रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उक्त दोनों मुकदमे जिला न्यायालय में परीक्षित हो रहे थे। वर्ष 2013 में शासन द्वारा जयराम सिंह पर दर्ज हुए मुकदमा को वापस लिए जाने के संबंध में राज्यपाल की अनुमति प्रदान किए जाने के बाद जिला मजिस्ट्रेट को प्रेषित किया था और उक्त कार्यवाही से शासन को अवगत कराने के संबंध में भी लिखा था। इसी के चलते उक्त मामले में सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अपर जिला शासकीय अधिवक्ता खुशीलाल लोधी द्वारा शासन के आदेश एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रेषित पत्र के आधार पर धारा 321 के तहत मुकदमा वापसी के लिए 16 सितंबर 2013 को पत्रावली में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। इस पर उसी समय से सुनवाई विचाराधीन चल रही थी। उक्त पत्रावली डकैती कोर्ट में धारा 321 के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए नियत थी। इसमें उक्त मामले को सुनवाई के बाद न्यायालय ने राज्यपाल के मुकदमा वापसी को जनहित व न्यायहित में मानते हुए अपनी स्वीकृति प्रदान कर दी। इस प्रकरण में शनिवार को सुनवाई के समय संजू राजा हत्याकांड मामले को वापस लिए जाने का आदेश कोर्ट ने पारित कर दिया। न्यायालय द्वारा निर्णय में स्पष्ट किया गया कि उक्त प्रकरण न्यायहित, जनहित का मामला था और तत्कालीन समय में जिला पंचायत अध्यक्षी को लेकर दोनों पक्षों में पूर्व से विवाद था। शासन द्वारा न्याय हित में सुरक्षा को देखते हुए उन्हें गनर दिया गया था। जयराम सिंह के पक्ष में जिला पंचायत के 11 सदस्य थे, फिर भी संजू राजा स्वयं जिला पंचायत अध्यक्ष बनना चाहते थे। इससे जयराम सिंह की सुरक्षा में तैनात गनर सुरेश द्वारा जयराम सिंह पर हुए हमले के बाद बचाव में अपना कर्तव्य पालन करते हुए उनका जीवन बचाया, जो उसकी जिम्मेदारी थी।
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