सत्ता का फरमान बेअसर, खनन जारी
ललितपुर। प्रशासन की नाक के नीचे बार थाना क्षेत्र में अवैध खनन हो रहा है। सरकार ने एक जुलाई से हर तरह के खनन पर रोक लगा दी है, इसके बाद भी सत्ता के रसूख के चलते अवैध खनन करने वाले धड़ल्ले से अपने काम को अंजाम दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में सत्ता बदल चुकी हैै, लेकिन अधिकारियों और नेताओं की कार्यप्रणाली पर कोई अंतर नहीं आया है। भाजपा के फायर ब्रांड नेता और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में अवैध खनन को सख्ती से रोकने के निर्देश दिए हैं, लेकिन यह निर्देश शायद पुलिस और प्रशासन तक नहीं पहुंचे हैं। सरकार ने अवैध बालू खनन पर सख्ती से रोक लगा दी, इसका परिणाम यह हुआ कि कुछ दिनों तक अवैध खनन माफिया भूमिगत हो गए और उनके वाहन घरों में खड़े होकर शोभा बढ़ाने लगे। कुछ मामलों पर सरकार नरम पड़ी और नदी के कुछ घाटों से बालू निकालने की अनुमति दी गई। जिले में बालू खनन के लिए खनन विभाग ने चार घाटों के लिए छह महीने की अनुमति ही दी है, लेकिन बारिश के मौसम में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए खनन विभाग ने पट्टे वाली खदानों पर भी एक जुलाई से तीस सितंबर तक के लिए खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस सबके बाद भी धड़ल्ले से अवैध खनन किया जा रहा है।
सपा सरकार में खुलेआम होने वाला अवैध खनन अब योगी सरकार में पर्दे के पीछे से होने लगा है। कसबा बार में बालू माफियाओं ने सत्ता बदलते ही सत्ताधारी पार्टी का दामन थाम कर अपने कारनामों को अंजाम देना शुरू कर दिया है। छोटे ट्रैक्टरों के माध्यम से शहर में सप्लाई की जाती है। जानकारी होने के बाद भी पुलिस और प्रशासन मूकदर्शक बनकर तमाशा देख रहा है।
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बिना नंबर के ट्रैक्टरों का किया जा रहा उपयोग
कस्बा बार में खनन माफिया द्वारा बालू खनन के लिए योजनाबद्ध तरीके से नदियों से खनन किया जा रहा है। बालू माफिया द्वारा ग्राम बछरावनी स्थित बछरावनी घाट एवं गुल्लाघाट से व्यापक स्तर पर बालू के खनन को अंजाम दिया जा रहा है। बालू ढोने में जिन ट्रैक्टरों का उपयोग किया जा रहा है, वह बिना नंबर के हैं। नदी के घाटों पर रात में बालू निकाल कर ट्रैक्टरों द्वारा कई स्थानों पर बालू एकत्रित कर ली जाती है। इनमें ग्राम बछरावनी एवं बार में अलग-अलग स्थानों पर बालू का स्टॉक किया गया है। इसके बाद कस्बे में छोटे ट्रैक्टर द्वारा बालू की बिक्री की जा रही है। बताते चलें कि सपा शासन में अवैध बालू के खनन में इसी खनन माफिया का ट्रैक्टर खनन विभाग द्वारा सीज कर दिया गया था। लेकिन, सत्ता बदलते ही उक्त व्यक्ति के ट्रैक्टर छूट गए एवं उसका खनन कारोबार चरम पर है। वर्तमान में एक ट्राली बालू की कीमत पांच हजार रुपये वसूली जा रही है।
वर्जन
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बालू खनन की सूचना मिली थी। जांच की तो पता चला कि पुरानी बालू को निर्माण कार्यों में प्रयोग किया जा रहा है। फिर भी यदि कहीं खनन हो रहा है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी।
रामसहाय सिंह, बार थानाध्यक्ष