फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों का भुगतान लटकाना पड़ा महंगा, खरीद पर लगाई रोक

विज्ञापन
विज्ञापन
किसानों का भुगतान लटकाना पड़ा महंगा, खरीद पर लगाई रोक
विज्ञापन

ललितपुुर। मल्टीस्टेट समितियों को किसानों का भुगतान लटकाना महंगा पड़ गया है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने समितियों की खरीद पर रोक लगा दी है। वर्तमान में समितियां किसानों का 232 लाख रुपये दबाए बैठी हैं।
जिले के विभिन्न स्थानों पर गेहूं खरीद के लिए 107 केंद्र खोले गए हैं। इनमें विपणन शाखा के तीन, मल्टीस्टेट सोसायटी समिति के 33, पीसीएफ के 58, नैफेड का 01, यूपीसीयू के 11 और भारतीय खाद्य निगम का 01 केंद्र है। इन केंद्रों पर किसान गेहूं की उपज बेचने के लिए पहुंच रहे हैं। किसानों को 72 घंटे में पैसे का भुगतान करने का प्रावधान है। लेकिन, इसके बाद भी समितियों द्वारा किसानों को भुगतान देने में लेटलतीफी की जा रही है। तमाम किसानों को भुगतान के अभाव में बेवजह परेशान होना पड़ रहा है। कोई शादी समारोह में शामिल नहीं हो पा रहा है तो किसी को उधारी चुकाने में दिक्कत आ रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इसे ध्यान में रखकर जिला खाद्य विपणन अधिकारी राकेश त्रिपाठी ने मल्टीस्टेट सोसायटी के क्रय केंद्रों की खरीद पर रोक लगा दी है। इन समितियों के 33 केंद्र विभिन्न स्थानों पर संचालित हो रहे हैं। जिन पर किसानों का 232 लाख रुपये का बकाया है। इससे पहले भी मल्टीस्टेट समितियों द्वारा खरीदे जा रहे गेहूं पर रोक लगा दी गई थी। उस दौरान समितियों ने किसानों का भुगतान शुरू कर दिया था। अब एक बार फिर समितियों की भुगतान के मामले में मनमानी उजागर हुई है। वहीं, जिले के कुल केंद्रों पर खरीद पर नजर डालें तो 36606.60 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है, जिसके मुकाबले 16656.05 मीट्रिक टन गेहूं की डिलेवरी गोदामों में हो गई है। वहीं, 19950.58 मीट्रिक टन गेहूं की डिलेवरी होना अवशेष है। इसी तरह 6808.83 लाख रुपये किसानों को भुगतान दिया जाना है, जिसके सापेक्ष 3079.48 लाख रुपये भुगतान अवशेष है। उधर, जिला खाद्य विपणन अधिकारी राकेश त्रिपाठी का कहना है कि जब तक मल्टीस्टेट समितियां किसानों का भुगतान नहीं करती, तब तक उन्हें गेहूं खरीदने नहीं दिया जाएगा।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें