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मंडी इंस्पैक्टर समेत दो मंडी सहायक निलंबित

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मंडी इंस्पेक्टर व दो मंडी सहायक निलंबित
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ललितपुर। कृषि मंडी सचल दल टीम द्वारा अवैध उगाही का मामला जांच में सही पाए जाने पर मंडी इंस्पेक्टर व दो मंडी सहायकों को निलंबित कर दिया गया है। मंडी इंस्पेक्टर को मऊरानीपुर व दो अन्य मंडी सहायकों को डीडीए कार्यालय झांसी अटैच किया गया है। उपकृषि निदेशक द्वारा की गई इस कार्रवाई से मंडी प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
कृषि मंडी से जिंस या अन्य प्रकार के फल, सब्जी आदि अन्य जनपदों में ले जाने के लिए उक्त वाहन को मंडी शुल्क देना होता है। लेकिन कई बार बहुत से वाहन बिना मंडी शुल्क अदा किए ही अन्य जनपद भेज दिए जाते हैं। इसके लिए शासन द्वारा मंडी सचल दल की टीम ऐसे वाहनों की निगरानी करती है और मंडी शुल्क की चोरी करने वाले वाहनों को पकड़कर उनसे जुर्माना वसूलती है। लेकिन अधिकांशत: सचल दल की टीमों द्वारा मंडी शुल्क नहीं होने पर भारी वाहन स्वामियों से उक्त जिंस या फल माल आदि पर भारी भरकम जुर्माना वसूलने की आड़ में अवैध वसूली की जाती है। यह धंधा वर्षों से चला आ रहा है, लेकिन कोई शिकायत या पुख्ता सबूत नहीं होने के चलते मंडी सचल दल के कर्मचारी अवैध वसूली में लिप्त रहते हैं और ऐसे वाहनों से खूब वसूली कर रहे हैं। गत एक सप्ताह पूर्व सोशल मीडिया पर मंडी सचल दल की टीम द्वारा मंडी शुल्क नहीं होने पर जुर्माना लगाने का भय दिखाते हुए भारी वाहनों से अवैध वसूली का एक वीडियो वायरल हो गया। शुरुआत में मामला दबाने का प्रयास किया गया, लेकिन बाद में इसकी आंच झांसी स्थित कृषि उपनिदेशक तक भी पहुंच गई। जिस पर डीडीए अमित यादव ने इसकी जांच कराने का निर्णय लिया और इस मामले की जांच झांसी के मंडी सचिव मनीष यादव को सौंपी गई। झांसी मंडी सचिव की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीडीए झांसी ने ललितपुर कृषि मंडी में पदस्थ मंडी इंस्पैक्टर गिरजेश तिवारी और डीडीए के निर्देश पर मंडी सचिव पुष्पेंद्र कुमार वर्मा ने दो मंडी सहायक अटल रावत और रमेश चंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कृषि मंडी सचल दल की टीम के सदस्यों पर अवैध उगाही के मामले में की गई इस कार्रवाई से मंडी प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।
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गेट पास में होता खेल
मंडी से जिंस माल को बाहर ले जाने से पूर्व निर्धारित मंडी शुल्क देकर मंडी गेट पास बनवाना होता है। लेकिन मंडी शुल्क बचाने के चक्कर में कई वाहन किसी प्रकार से जुगाड़ लगाकर बिना गेट पास के ही बाहर निकाल लिए जाते हैं और मंडी शुल्क बचा लेते हैं। लेकिन आगे चलकर इन्हें सचल दल की टीमों से भी निपटना होता है। जिसकी व्यवस्था भी उन्हें करनी होती है, नहीं तो उन्हें मंडी शुल्क चोरी करने के आरोप में पकड़े जाने पर भारी जुर्माना भरना होता है और वह माल भी जुर्माना अदा नहीं करते तक जब्त कर लिया जाता है।
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