ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों को देखकर कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस की तीसरी लहर आई तो लोगों का प्रभावित होना लगभग तय है। हालांकि, विभाग ने स्वास्थ्य विभाग पीकू वार्ड स्थापित किया है, लेकिन सबसे बड़ी कमी विशेषज्ञों की है। जिले में 18 वर्ष से कम उम्र के 4,14000 बच्चे हैं और इन पर आठ विशेषज्ञ चिकित्सक हैं। ऐसे में एक चिकित्सक के सहारे 51750 बच्चे होंगे।
जिले में कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर से निपटने के लिए तमाम तैयारियां की जा रही हैं। इनमें मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में 12 बेड का पीकू वार्ड बनाया जा रहा है। वहीं, ऑक्सीजन के प्लांटों की तैयारियां की जा रही हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में तालबेहट के अलावा महरौनी व बार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर 50-50 बेड के कोविड एल-1 अटैच अस्पताल बनाए जा रहे हैं। सैनिटाइजेशन, वैक्सीनेशन जैसी अन्य तैयारियां की जा रही है लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण की तीसरी लहर में बच्चों के चपेट में आने की अधिक संभावना जताई जा रही है। जनपद की कुल आबादी 13 लाख 80 हजार बताई गई है। इसके 30 फीसदी 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की संख्या है। इस तरह बच्चों की संख्या 414000 बताई गई है। इस हिसाब से एक विशेषज्ञ चिकित्सक पर 51750 बच्चे हैं। ऐसे में संक्रमण बढ़ने की स्थिति में चिकित्सकों का टोटा पड़ जाएगा। ऐसे में बच्चों के संक्रमण से बचाव की तैयारियां अधूरी मानी जा रही हैं, जब विशेषज्ञों का अभाव है, तो उपचार की समस्या बनी हुई है।
जिला अस्पताल में 12 बेड का है पीकू वार्ड
कोरोना की तीसरी लहर के दौरान गंभीर लक्षणों वाले बच्चों को भर्ती कर उपचार की सुविधा के लिए पीकू वार्ड का स्थापित किया गया है। इनमें 12 बेडों के सापेक्ष सभी पर वेंटीलेटर जैसी सुविधाएं है। इसके अलावा सभी प्रकार की दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी।
जनपद में मात्र आठ बाल रोग विशेषज्ञ हैं
एक पीकू वार्ड में छह चिकित्सक नियुक्त करने का प्रावधान है। ऐसे में जनपद में मात्र आठ बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इनमें तीन चिकित्सक एसएनसीयू में तैनात हैं, जो पीकू वार्ड में तैनात नहीं किए जा सकेंगे। इसके अलावा एक चिकित्सक महरौनी में सीएससी अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं। चार चिकित्सक की जनपद में सेवाएं दे सकेंगे।
पीकू वार्ड में स्टाफ मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराया जाएगा। पीकू वार्ड में छह विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात रहेंगे।
- डॉ. हरेंद्र चौहान, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला महिला अस्पताल/ जिला महिला अस्पताल