- डंपिंग ग्राउंड में कचरा निस्तारण में नौ फीसदी अंक किए प्राप्त किए
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। नगर पालिका ने कचरा कलेक्शन व सूखा-गीला कचरा अलग करने के लिए लोगों को जागरूक के नाम पर लाख लाख रुपये प्रतिमाह खर्च किए हैं, लेकिन वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण के आंकड़ों ने जागरूक करने वाली संस्था की पोल खोल दी है। पालिका ने अलग-अलग कचरा करने में 28 फीसदी अंक प्राप्त किए तो वहीं घर-घर कचरा कलेक्शन में 30 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं।
शहर को स्वच्छ रखने के लिए नगर पालिका परिषद ने एक कंपनी से अनुबंध किया है, जो घर-घर जाकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक कर रही है। इसमें घर से निकलने वाले कचरा को कलेक्शन वाहन में डालने के लिए जागरूक कर रही है। साथ ही सूखे व गीले कचरा को अलग-अलग करने के लिए जागरूक करना है। इसमें प्रतिमाह पालिका ने दस लाख रुपये खर्च कर रही है।
लेकिन, पालिका को सार्थक परिणाम प्राप्त नहीं हो पा रहा है। इसका खुलासा स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 की रिपोर्ट में हुआ है। आकड़ों में सूखे कचरा को अलग-अलग करने की जागरुकता में महज 28 फीसदी अंक प्राप्त किए हैं। यही नहीं घर-घर कचरा कलेक्शन में 30 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं। ऐसे में नगर पालिका को स्वच्छ बनाने के दावों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
-
डंपिंग स्थल पर कचरा निस्तारण रही फेल
नगर पालिका साफ-सफाई में ही फिसड्डी नहीं रही है। डंपिंग स्थल पर कचरा निस्तारण में ही फेल रही है। इसमें पालिका को महज नौ फीसदी ही अंक प्राप्त हो सके हैं। हो भी तो क्यों नहीं, जब कचरा का निस्तारण ही नहीं हो पा रहा है। प्लांट तो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन मशीनों का अभाव बना हुआ है।
-
सार्वजनिक शौचालय की साफ-सफाई में फेल हुई पालिका
नगर पालिका स्वच्छता सर्वेक्षण 2024 में सार्वजनिक शौचालयों में की सफाई व्यवस्था ध्वस्त पाई गई है। इसमें महज 67 फीसदी ही अंक प्राप्त किए हैं। ऐसे में पालिका द्वारा शहर में संचालित सार्वजनिक शौचालयों की सफाई व्यवस्था का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। वर्तमान में अधिकांश मूत्रालयों में पानी नहीं है। कइयों में तो नल तक गायब हो गए हैं।
-
इनमें रही अव्वल
नगर पालिका ने स्वच्छता सर्वेक्षण में आवासीय क्षेत्र की सफाई, बाजार क्षेत्र की सफाई, पेयजल संसाधन, कचरा प्लांट में प्रगति अच्छी रही है।
-
सर्वेक्षण के समय नेटवर्क की समस्या से फीडिंग नहीं हो सकी है। पालिका में सफाई व्यवस्था बेहतर है।-दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद