जाखलौन (ललितपुर)। परिषदीय स्कूलों के रखरखाव के लिए कंपोजिट ग्रांट की व्यवस्था सरकार ने की है। इसके बाद भी स्कूलों में इस ग्रांट से जरूरत के कार्य नहीं कराए जा रहे हैं। स्थिति यह है कि बारिश के दौरान कोई स्कूल टपक रहा तो किसी के परिसर व छत पर जमी घास समस्या बढ़ा रही है। बीएसए रणवीर सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जर्जर भवन में बच्चों को न बिठाएं, इसके बाद भी उन कक्षाओं में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। पेश है क्षेत्र के दो स्कूलों की रिपोर्ट...।
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दृश्य एक
ब्लॉक बिरधा की ग्राम पंचायत कपासी स्थित प्राथमिक विद्यालय तीन साल में ही जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। आलम यह है कि बारिश के दौरान कक्षाओं में पानी टपक रहा है। दीवारों में दरारें पड़ गई हैं, जिससे कभी भी कोई अनहोनी घटना से इन्कार नहीं किया जा सकता। एक कमरे में चटकी दीवार से आरपार देखा जा सकता है। बच्चों को जर्जर स्कूल में बैठाकर पढ़ाना खतरे से खाली नहीं है। इसी साल अप्रैल में जर्जर स्कूल की रिपोर्ट विभाग के माध्यम से लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने भेजी थी, जिसमें दो अतिरिक्त कक्ष और भवन की छत का जिक्र किया गया था। उस समय भवन की दीवारों की मरम्मत करवाई गई थीं। अब बरसात में फिर से दरारें पड़ गई हैं।
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दृश्य दो
सहरिया बस्ती महुआवारा स्थित प्राथमिक विद्यालय भवन में गंदगी फैली है। स्कूल परिसर में घास बड़ी हो गई है, जिसे कटवाने की जहमत नहीं उठाई गई। बारिश से कमरे की दीवारों में सीलन आ गई है। इस स्कूल में सहरिया समुदाय के बच्चे पढ़ने आते हैं। बच्चों ने बताया कि घास में पानी भर जाने से मच्छर पनप रहे हैं। कीड़े-मकोड़ों का भी खतरा रहता है।
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बोलीं ग्राम प्रधान
प्राथमिक विद्यालय कपासी जर्जर हालत में है। पूर्व में ही जिला प्रशासन को अवगत करा दिया था। विभाग स्तर पर जर्जर भवनों की सूची में इसे शामिल होना बताया गया है। प्रशासन जल्द ही स्कूल की मरम्मत कराए।-गीता देवी, प्रधान कपासी