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डेढ़ वर्ष बाद भी नहीं किया जा सका केंसर मरीजों की पहचान, कैसे संभव हो इलाज

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कैंसर रोगियों की नहीं हो सकी पहचान, कैसे हो इलाज
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ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग द्वारा डेढ़ वर्ष पहले शुरू की गई योजना पर अब तक अमल नहीं हो सका है। कैंसर रोगियों की जांच नहीं हो पाने के कारण जानकारी नहीं मिल पा रही है कि जिले में कितने रोगी हैं। इस कारण मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में शासन द्वारा बेहतर कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण योजनाएं धरातल पर नजर नहीं आ रहीं हैैं। ऐसी ही स्थिति डेढ़ वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विभाग द्वारा शुरू किए गए कैंसर रोगी चिह्नींकरण अभियान की है। इस अभियान का उद्देश्य था कि कैंसर रोगियों की पहचान करने के बाद उपचार की सुविधा मुहैया कराई जाए। इसमें मुंह का कैंसर, स्तन कैंसर व बच्चादानी का कैंसर शामिल था। लेकिन, अब तक कैंसर रोगियों की पहचान नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं चिह्नींकरण नहीं होने से संभावित रोगियों की पुष्टि नहीं हो पा रही है। बीमारी का कारण स्पष्ट नहीं होने के कारण रोगी को उपचार नहीं मिल पा रहा है। कुछ मरीज तो दर्द निवारक दवाइयों के सहारे चल रहे हैं।
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डेढ़ वर्ष पूर्व होना था चिह्नींकरण
अप्रैल 2018 में स्वास्थ्य विभाग ने कैंसर रोगियों को उपचार की सुविधा मुहैया कराने की रूपरेखा तय की थी। इसमें कैंसर रोगियों को चिह्नित करने की योजना बनाई गई थी। रोगी चिह्नींकरण का कार्य आशा व एएनएम को सौंपा गया था। कुछ महींनों तक चिह्नींकरण का प्रशिक्षण नहीं देने के कारण विभागीय कर्मचारी रोगियों की पहचान नहीं कर सके। इसके बाद प्रशिक्षण दिया गया। लेकिन, डेढ़ वर्ष बीतने के बाद भी अब तक ग्रामीण क्षेत्रों के रोगियों की पहचान नहीं हो सकी है। इससे विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
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यह है चिह्नींकरण की प्रक्रिया
आशाओं को घर-घर जाकर परिवार के प्रत्येक सदस्य की स्वास्थ्य कुंडली बनाई जानी थी। इसमें परिवार के 30 वर्ष व इससे ऊपर की उम्र के सदस्यों को शामिल किया गया है। सर्वे के दौरान स्वास्थ्य कर्मी परिवार के प्रत्येक सदस्य का स्वास्थ्य ब्योरा जुटाना था। इसमें मुंह का कैंसर, बच्चा दानी का कैंसर, स्तन कैंसर के साथ ही मधुमेह रोग व रक्तचाप शामिल है। यदि किसी व्यक्ति में संबंधित रोगों से संबंधित लक्षण पाए जाते हैं तो उन्हें जिला अस्पताल की एनसीडी सेल में बुलाया जाता, जहां पर उपचार किया जाना था। अगर कैंसर के शुरूआती लक्षण पाए जाते हैं तो उसके शरीर के संबंधित हिस्से के टुकड़े लेकर जांच के लिए झांसी व मुंबई भेजा जाना था। रोग की पुष्टि होने पर मरीज को रेफर करने की भी योजना थी। इसके अतिरिक्त उपकेंद्र पर एएनएम प्रत्येक बृहस्पतिवार को संबंधित रोगियों की जांच करने, साथ ही स्तन कैंसर की भी जांच की व्यवस्था थी।
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जिले में कैंसर रोग पहचान के लिए आशाओं से लोगों की स्वास्थ्य कुंडली बनाने का कार्य शुरु कर दिया है। कुंडली बनते ही रोगियों की पहचान का कार्य शुरु कर दिया जाएगा। वर्तमान में बच्चादानी कैंसर रोगी पहचान के लिए जिला महिला अस्पताल, सीएचसी तालबेहट, सीएचसी महरौनी में संपूर्णा क्लीनिक संचालित किए जा रहे हैं।
- डा. प्रताप सिंह
मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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