ललितपुर। सिलगन रेलवे क्रॉसिंग पर रेल के ऊपर रेल (आरओआर) का निर्माण एक वर्ष से अधिक समय से अधूरा है। इस अधूरे काम के कारण ललितपुर-बिरारी फ्लाईओवर का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। रेलवे को आरओआर के पूरा होने का इंतजार है, ताकि ट्रेनें सीधे फ्लाईओवर से टीकमगढ़-खजुराहो के लिए चल सकें।
ललितपुर से झांसी और बीना के बीच तीसरी रेल लाइन का काम पूरा हो गया है। आगासौद में तीसरी लाइन का रिमॉडलिंग कार्य भी अंतिम चरण में है। टीकमगढ़-खजुराहो रेल लाइन पर ललितपुर से बिरारी फ्लाईओवर और 15.8 किलोमीटर लंबी दूसरी रेल लाइन बिछाने का अधिकांश काम पूरा हो गया है। इस रेल खंड में 28 रेल पुलों का निर्माण भी किया गया है। सिद्धन मंदिर के आगे ललितपुर-बिरारी फ्लाईओवर का निर्माण भी अंतिम चरण में है। सिद्धन के पास खपना पुल पर नवीन पुल का कार्य पूरा हो चुका है। सिलगन क्रॉसिंग पर आरओआर के पिलर बनाकर दोनों ओर के हिस्से रख दिए गए हैं। हालांकि, बीच के हिस्से में रेल लाइन बिछाने का काम अधूरा है, जिससे दोहरीकरण रुका हुआ है। रेलवे इस दोहरीकरण का निर्माण लगभग 304.44 करोड़ रुपये की लागत से कर रहा है।
रेल लाइन की क्षमता में वृद्धि
ललितपुर से बिरारी रेलवे स्टेशन तक फ्लाईओवर का काम पूरा होने से रेल लाइन की क्षमता बढ़ जाएगी। रेल दोहरीकरण होने से ट्रेनों का समय से संचालन हो सकेगा। इससे रेलवे परिचालन में दक्षता आएगी। यह क्षेत्र के रेल नेटवर्क को मजबूत करेगा।
ट्रेनों का सीधा संचालन
दैलवारा से न्यू टाउन ललितपुर स्टेशन तक कॉड लाइन एक वर्ष पहले ही बनकर तैयार हो चुकी है। इस पर सवारी और मालगाड़ी ट्रेनों का संचालन भी शुरू हो गया है। ललितपुर में यार्ड रिमॉडलिंग के दौरान वंदेभारत सहित कई ट्रेनों को दैलवारा होकर डायवर्ट किया गया था। यह फ्लाईओवर बनने से भोपाल से आने वाली ट्रेनें ललितपुर में बिना रुके सीधे न्यू टाउन स्टेशन से टीकमगढ़-खजुराहो जा सकेंगी।
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ललितपुर से बिरारी तक फ्लाईओवर व रेल दोहरीकरण का काम प्रगति पर है। इस रेल खंड में रेल लाइन का अधिकांश निर्माण हो चुका है, जबकि बाकी काम प्रगति पर है। इसी के तहत रेल पुलों का निर्माण भी किया जा रहा है।
-मनोज कुमार सिंह, पीआरओ, रेलवे झांसी।