अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। संसाधनों की कमी से पाली क्षेत्र में पान की खेती दम तोड़ रही है। कभी पाली का पान पाकिस्तान के लाहौर तक जाता था, लेकिन अब बरेली सहित अन्य मंडियों में पहुंचना मुश्किल हो रहा है। बरेली जाने वाली रोडवेज बस कोरोना काल से बंद कर दी गई, जिससे किसान किराये पर गाड़ी लेकर बरेली सहित अन्य मंडियों तक पान ले जाते हैं। निजी वाहन से भाड़ा अधिक पड़ने के कारण किसान परेशान हैं। पान की खेती का दायरा 800 से घटकर 100 एकड़ पर आ गया है।
पाली तहसील क्षेत्र में चार दशक पूर्व पांच हजार किसान 800 एकड़ खेत में पान की खेती करते थे। यहां के किसानों का कहना है कि वर्ष 1976 तक पाली का पान लाहौर तक भेजा गया था। बाद में संसाधनों के अभाव में दिल्ली, बरेली, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर, अजमेर तक सीमित हो गया। वर्ष 1980 के बाद दूरदराज के जनपदों में पान भेजने में अधिक भाड़ा लगने के कारण यहां से बरेली जाने वाली रोडवेज की बस से पान की डलियां बरेली और आसपास के जनपदों तक भेजी जाने लगीं।
कोरोना काल में बरेली जाने वाली रोडवेज बस भी बंद हो गई, इससे पान की खेती करने वाले किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक दशक से किसान पान की खेती का दायरा सीमित करते जा रहे हैं। वर्तमान में 100 एकड़ में करीब 200 किसानों के परिवार पान की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि शासन की अनदेखी के चलते उन्हें आवश्यक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
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निजी वाहन से 3500 रुपये आ रहा खर्च : किसानों का कहना है कि पहले रोडवेज बस नियमित बरेली जाती थी। इससे उनकी डलियां 600 रुपये में बरेली तक पहुंच जाती थीं, लेकिन बस बंद होने से उन्हें किराये पर गाड़ी ले जाना पड़ता है जिसका भाड़ा करीब 3500 रुपये तक पड़ जाता है। वह भी सप्ताह में एक या दो दिन ही जा पाते हैं। इस वजह से पान डलियों में ही खराब हो जाता है और उन्हें काफी नुकसान उठाना पड़ता है। किसानों ने बस का संचालन शुरू कराने की मांग की है।
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फैक्ट फाइल
पहले खेती करने वाले किसान - पांच हजार
खेती का दायरा - 800 एकड़
टोकरी का बस से भाड़ा - 600 रुपये
अब खेती करने वाले किसान - 200
अब खेती का दायरा - 100 एकड़
अब निजी वाहन से भाड़ा - 3500