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पचास हजार की फसल बेची, अब चार हजार के लिए लाइन

Thu, 17 Nov 2016 12:40 AM IST
lalitpur
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बैंक - फोटो : amar ujala
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 गल्ला मंडी में 50 हजार रुपये की फसल बेचकर चार हजार रुपये बदलने को गांव का किसान बैंकों की लंबी-लंबी लाइनों में लग रहा है, व्यापारियों द्वारा पांच सौ व एक हजार रुपए के नोट देने पर बहुत से किसान मंडी से जिंस लेकर वापस भी लौट जा रहा है। ऐसे में गल्ला मंडी में सामान्य दिनों में 15 हजार क्विंटल जिंस के सापेक्ष मात्र चार सौ से 500 क्विंटल जिंस की आवक ही रह गई है।
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पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने के चलते एक सप्ताह से लगातार मंडी में बंद जैसे आसार चल रहे हैं। इक्का दुक्का आढ़तियों की दुकानें ही खुल रही हैं। व्यापारी व किसान मंडी में रकम को रोकने को तो तैयार है, लेकिन  पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट लेने से हर कोई परहेज कर रहा है।  हालांकि व्यापारियों द्वारा पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट किसानों को जिंस मंडी लाने पर थमाए जा रहे हैं, जिस पर बहुत से किसान तो बड़े नोट देखकर ही सीधे शब्दों में आढ़तियों को यह नोट लेने से मना कर दे रहे हैं, तो वहीं बहुत से किसान इन नोटों को तो ले रहे हैं, लेकिन उन्हें बार-बार बैंकों में  नोट जमा करने और नोट बदलने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि किसान गल्ला मंडी नहीं पहुंच रहा है, जिससे मंडी में जिंस  की आवक सामान्य दिनों में जहां 12 से 15 हजार क्विंटल तक रहती थी, वहां एक सप्ताह से स्थिति यह है कि किसी दिन चार सौ क्विंटल तो किसी दिन पांच सौ क्विंटल ही आवक हो रही है। किसान व व्यापारी नगद कैश लेने व देने के लिए परेशान भी है और मजबूर भी, लेकिन अधिकांश व्यापारी व किसान पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट बंद होने का समर्थन भी करता नजर आ रहा है,  हालांकि परेशान होने पर झल्लाता भी दिखाई दे रहा है। वहीं गल्ला व्यापारी  के पास जिंस उठाने व चढ़ाने को लेबर चार्ज के लिए परेशान होना पड़ रहा है।


उड़द बेचकर महंगी खाद खरीदी
ललितपुर। तालबेहट अंतर्गत ग्राम बढ़वाहा निवासी देवी सिंह ने कहा कि उन्होंने गल्ला मंडी आकर 57 हजार रुपये की उड़द बेची है, लेकिन इसके एबज में आढ़तियां  द्वारा उसे पांच सौ व एक हजार रुपये के नोट ही दिए गए हैं, जिस पर उसने कुछ खाद खरीद ली है, लेकिन यह खाद उसे बाजार रेट 1030 रुपए के बजाय 1200 रुपए  में दी गई है। उसने बताया कि उसे कुछ फुटकर रुपये की आवश्यकता है, जिसके चलते आज वह चार रुपये के नोट लेने को बैंक की लाइन में लगकर अपनी बारी का  इंतजार कर रहा है।
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दवाई कड़वी जरूर है, लेकिन मर्ज अच्छा है
ललितपुर। व्यापारी व गल्ला व्यापार मंडल के मंत्री संजीव जैन कप्तान ने कहा कि व्यापारियों के पास वर्तमान में कैश न होने के कारण किसानों को परेशानी हो रही है। बैंकों से रुपये की निकासी नहीं हो पा रही है। इसमें व्यापारियों व किसानों दोनों को नुकसान भी जरूर हो रहा है, लेकिन नोट बंद करने का निर्णय स्वागत योग्य है। उन्होंने कहा कि दवाई कड़वी जरूर है, लेकिन मर्ज अच्छा है।
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