1.71 करोड़ की धोखाधड़ी में शामिल दोनों आरोपी हाल ही में हुए थे गिरफ्तार
चार दिन पहले पुलिस ने पकड़ा था आरोपी अभिनव निगम और महेंद्र राय को
संवाद न्यूज एजेंसी
ललितपुर। बजाज फाइनेंस फ्रॉड प्रकरण में चार दिन पहले गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों की जमानत याचिका प्रभारी सीजेएम की अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए निरस्त कर दी।
बजाज फाइनेंस कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर संदीप सोलंकी की तहरीर पर कोतवाली पुलिस ने पांच अगस्त को सात नामजद और एक अज्ञात आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। आरोप था कि आरोपियों ने कूटरचित दस्तावेज तैयार कर कंपनी को 1,71 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया। मामले की गंभीरता देखते हुए एसपी ने जिला स्तरीय एसआईटी का गठन कर जांच कराई।
जांच के दौरान पुलिस ने नवनीत, महेंद्र, करन, राशिद खान उर्फ सानू, उसकी मां राशिदा, मोहल्ला गोविंदनगर निवासी शमीम खान और मोहल्ला रामनगर निवासी शिवम राठौर को गिरफ्तार किया था। इनके पास से कंप्यूटर, प्रिंटर, मोहर समेत कई अहम दस्तावेज बरामद हुए थे। गिरफ्तारी के बाद शिवम के पिता लक्ष्मीनारायण राठौर ने टीकमगढ़ में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके विरोध में परिजनों ने इलाइट चौराहे पर शव रखकर प्रदर्शन किया। जाम लगाने के मामले में सपा नेता सहित कई लोगों पर केस दर्ज हुआ। बाद में पुलिस ने शिवम पर लगी पुरानी धारा हटाकर नई धाराएं जोड़ीं, जिसके बाद उसे सीजेएम कोर्ट से जमानत मिल गई।
उधर, महिला आरोपी राशिदा की सूर्योदय से पहले की गई गिरफ्तारी पर न्यायालय ने कोतवाल को तलब कर स्पष्टीकरण मांगा था। विवेचक को सीसीटीवी फुटेज पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
इस बीच, आठ नवंबर को पुलिस ने सातों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। इसके बाद महेंद्र बरार, करन, शमीम खान और नवनीत सिंह की जमानत याचिकाएं अदालत ने खारिज कर दी थीं।
28 नवंबर को कोतवाली पुलिस ने चार और आरोपियों ग्वालियर के मुरार क्षेत्र के कालपी ब्रिज निवासी पारस वर्मा, शहर के नेहरू नगर टौरिया मंदिर निवासी महेंद्र राय, शिवपुरी जिले के दिनारा निवासी विकास दिवाकर और लखनऊ के थाना पारा क्षेत्र के गायत्री विहार निवासी व बजाज फाइनेंस कंपनी झांसी के सीनियर एरिया सेल्स मैनेजर अभिनव निगम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
इसी क्रम में आरोपियों अभिनव निगम और महेंद्र राय ने जमानत याचिका दायर की, जिसे प्रभारी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट देवप्रिय सारस्वत की अदालत ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए खारिज कर दिया।
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