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भूमि पूजन के साथ ही पांच सौ साल पुरानी समस्या का हो जाएगा अंत

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अयोध्या में संतों की सेवा में लगे भगवान सिंह - फोटो : LALITPUR
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ललितपुर। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन के साथ ही पांच सौ साल पुरानी समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी। भाजपा सहित जिन नेताओं ने इस आंदोलन में भाग लिया, आज वे गदगद हैं। जिले के पांच नेताओं को इस आंदोलन में रासुका झेलनी पड़ी थी। हालांकि, मुलायम सिंह सरकार ने इस निर्णय को बाद में वापस ले लिया था। अब तो कांग्रेस सहित अन्य दलों के नेताओं के सुर भी बदलने लगे हैं। स्थानीय विहिप नेता को संतों की सेवा व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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मंगलवार को मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने हनुमान चालीसा का पाठ किया। कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी ने भी मंदिर निर्माण के पक्ष में संतुलित बयान जारी किया है। आज पांच अगस्त को अयोध्या में भूमि पूजन होने जा रहा है। इसमें स्वयं प्रधानमंत्री प्रतिभाग कर रहे हैं। विश्व हिंदू परिषद के प्रांत उपाध्यक्ष भगवान सिंह को इस आयोजन में शामिल हो रहे संतों की सेवा व्यवस्था का जिम्मा सौंपा गया है। वर्ष 1989 में एकात्मक यात्रा से लेकर विभिन्न कारसेवा में जिला का प्रतिनिधित्व रहा। इनमें रामविलास हुंडैत, हरीशंकर दुबे, सदाशिव शुक्ला, अवध बिहारी उपाध्याय, सुधांशु हुंडैत, भगवान सिंह, रामगोपाल नामदेव, राजेश साहू, भरत रिछारिया, आनंद मालवीय, संतोष तिवारी, पूर्व विधायक देवेंद्र सिंह, डॉ. अरविंद कुमार जैन, प्रेमचंद कुर्मी, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, वीके सरदार, धर्मेंद्र गोस्वामी, अरविंद सिंघई, पप्पी राजा, अजय जैन, देवेंद्र गुरू और मनीष अग्रवाल ने बढ़ - चढ़कर हिस्सेदारी जताई थी। अरविंद सिंघई पर न सिर्फ रासुका लगाई गई, बल्कि सांप्रदायिकता के तीन मुकदमे भी दर्ज हुए। आंदोलन में प्रतिभाग कर चुके नेताओं का कहना है कि आज देश के एक सौ तीस करोड़ लोगों का सपना साकार हो रहा है।
वर्ष 1986 में विद्यार्थी परिषद से जुड़ने पर सीधे श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में कूदने का मौका प्राप्त हुआ। वर्ष 1989 एवं 1992 में कारसेवा में भाग लेने का अवसर मिला। जन्मभूमि आंदोलन में दो बार श्रीराम के नाम पर जेल जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। बुधवार को नगर के विभिन्न मंदिरों और घरों में दीपक जलाए जाएंगे। इस दौरान प्रसाद बंटवाकर आनंद प्राप्त करेंगे। - मनीष अग्रवाल, नगराध्यक्ष भाजपा
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उस दौरान के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह ने आंदोलन की धार कुंद करने के लिए धारा 151 के तहत बंद होने वाले लोगों की तुरंत जमानत लेना बंद करा दिया था। जिससे लोगों को एक-एक माह जेल में बंद रहना पड़ा। एकात्मक यात्रा से आंदोलन ने गति पकड़ी। इसके बाद रामजानकी यात्रा, शिला पूजन यात्रा भी निकाली गई। तीन मुकदमे सांप्रदायिकता फैलाने के झेलने पड़े। जिस समय राजमाता सिंधिया की गिरफ्तारी हुई, उसी दौरान हमें भी पुलिस ने पकड़ लिया। उरई जेल में एक माह रहना पड़ा। इसी दौरान धन्नूलाल गौतम, श्रवण त्रिपाठी, रघुवर दयाल श्रीवास्तव, पप्पी राजा भी साथ रहे। सरकार ने पांच लोगों पर रासुका तामाली करा दी। इसमें उन पर कार्रवाई हुई। एक माह बाद सरकार ने इसे वापस ले लिया। - अरविंद सिंघई
वर्ष 1990 में उरई जेल में बंद रहे। इसके बाद फतेहगढ़ जेल में बंद हुए। छह दिसंबर1992 में ढांचा ढहाए जाने के दौरान अयोध्या में मौजूद था। 28 मार्च 2002 में शिलादान कार्यक्रम अयोध्या में रखा गया। इस दौरान इस आयोजन पर रोक लगा दी गई। संगठन मंत्री के आदेश पर इस आयोजन में शामिल होने के लिए कूद किया। कोई साधन नहीं मिला तो प्रतापगढ़ से 72 किमी पैदल चले, आज भी वह याद है। - भगवान सिंह, प्रांत उपाध्यक्ष, विहिप
वर्ष 1985 से लेकर 91 तक भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे। इस दौरान श्रीराम मंदिर का आंदोलन चरम पर था। एक ऐसा समय आया, जब तत्कालीन सांसद राजेंद्र अग्निहोत्री को संसद की कार्रवाई में प्रतिभाग करना था। पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए उनके यहां दबिश दी। आंदोलन में कई यातनाएं झेली। आडवाणी की यात्रा जब आई थी, तब सागर जिले से आते समय उनका जोरदार स्वागत किया था। आज कांग्रेस के लोगों में भी सद्बुद्घि आ रही है। - प्रेमचंद पटेल, पूर्व जिलाध्यक्ष, भाजपा
जिस दिन ललितपुर में श्रीराम ज्योति आई थी, उसी दिन से उत्साह चरमोत्कर्ष पर था। वर्ष 1990 में मंगलवार को राजमाता सिंधिया ललितपुर आईं थीं, तब हम लोग उन्हें लेने बैरियर तक गए थे। लौट कर पुलिस लाइन में जब आए तो जानकारी मिली कल्याण सिंह बांदा में गिरफ्तार हो गए। हम लोग आधे घंटे में सावरकर चौक पहुंचे तो सभी गिरफ्तार कर लिए गए। ललितपुर के ज्यादातर कार्यकर्ता उरई और फतेहगढ़ जेल में थे। लालकृष्ण आडवाणी जब माताटीला अस्थाई जेल में थे, तब उनसे मिलने का मौका मिला था। यह भगवान राम का प्रभाव ही है कि कभी इन बातों को सुनाने में डर लगता था और आज हम उसे गर्व से सुना रहे हैं। - देवेंद्र गुरू, मीडिया प्रभारी भाजपा
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