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मजदूरी मांगने पर छत्तीसगढु में मजदूरों को किया प्रताड़ित

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ललितपुर। जिले के पाली कसबे के मजदूरों को छत्तीसगढ़ में एक ठेकेदार नें बंधक बना लिया। हैल्प लाइन के जरिए सूचना मिलने पर जिला प्रशासन ने मुक्त करा लिया है।
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जनपद के थाना पाली अन्तर्गत ग्राम बछलापुर के दो दर्जन ग्रामीणों को एक ठेकेदार काम के बहाने छत्तीसगढ़ ले जाकर सुकवां में निर्माणाधीन एक इमारत के कार्य करने के लिए ले गया। वहां मजदूरों को चहारदीवारी के अंदर बंधक बनाकर मजदूरी करायी। जब मजदूरों ने मजदूरी मांगी तो ठेकेदार एवं उनके गुर्गों द्वारा प्रताड़ित किया गया। किसी तरह मजदूरों ने दो माह मजदूरी का काम किया, लेकिन मजदूरी नहीं मिलने पर उनके सामने भुखमरी की नौबत आ गई। इस दौरान उन्हें जनपद में संचालित हो रही हेल्पलाइन के बारे में जानकारी हुई, तो उन्होंने हेल्पलाइन पर सूचना दी। मजदूरों के बंधक बनाने की सूचना पर हेल्पलाइन के पदाधिकारी सक्रिय हुए और उन्होंने जिला प्रशासन को जानकारी दी। इस पर जिला प्रशासन ने इस मामले में छत्तीसगढ़ के अधिकारियों से बात की और हेल्पलाइन के सदस्यों को छत्तीसगढ़ भेजा। छत्तीसगढ़ पहुंचने पर वहां के प्रशासन द्वारा मजदूरों को मुक्त कराते हुए उनकी मजदूरी दिलाई गई और उन्हें सुरक्षित जनपद ललितपुर वापस भेजा गया। बीते बृहस्पतिवार को सभी मजदूर जिला मुख्यालय आए और कलेक्ट्रेट परिसर में आपबीती सुनाई। इस मामले में अपर जिलाधिकारी अनिल कुमार मिश्रा ने उन्हें कार्रर्वाई का आश्वासन दिया। तहसील पाली अन्तर्गत ग्राम बछलापुर निवासी हन्नू, सोनू सहरिया, राजेन्द्र सहरिया, श्रीबाई, लाड़ले, शोभारानी, नौनीतराम, कंछेदी, पानबाई, देवेन्द्र, पिस्ता, मनसुआ एवं अन्य ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को शिकायती पत्र देकर बताया कि वह काफी गरीब परिवार हैं और मेहनत मजदूरी कर अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। विगत 5 माह पूर्व सिमरिया निवासी एक ठेकेदार उनके गांव आया और मजदूरी एवं रुपयों का लालच देकर अपने साथ मजदूरी कराने नागपुर की कहकर ले गया। आरोप लगाया गया है कि ठेकेदार उन्हें धोखे में रखकर छत्तीसगढ़ के सुकमा में ले गया और वहां भवन निर्माण के कार्य में लगा दिया और ठेकेदार वापिस आ गया। मजदूरों ने आरोप लगाते हुए बताया कि सुकमा में ठेकेदार द्वारा उन्हें चहारदीवारी में बंधक बना दिया गया और मजदूरी मांगने पर ठेकेदार एवं उनके आदमियों द्वारा उनके साथ मारपीट की गयी। जिससे मजदूरी न मिलने के कारण वह भुखमरी की कगार पर आ गये। इसी दौरान उन्हें ललितपुर में संचालित हो रही निर्माण मजदूर सशक्तिकरण हेल्पलाइन के बारे में जानकारी हुई, जिससे उन्हें हेल्पलाइन के कार्यकर्ताओं से अपनी आपबीती सुनाईं। जिसके बाद उन्हें वहां से मुक्त कराया गया।
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