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Lalitpur News: दो करोड़ के इंतजाम, फिर भी एक घंटे की बारिश में शहर जलमग्न

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ललितपुर। जलभराव से निपटने के लिए नगर पालिका को दो करोड़ रुपये मिलने के बावजूद बृहस्पतिवार शाम हुई तेज बारिश ने जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। करीब एक घंटे की बारिश के बाद शहर की प्रमुख सड़कें और कई मोहल्ले पानी में डूब गए। कई जगह घुटनों तक पानी भर गया। गणेश पंडालों में पानी पहुंच गया तो श्रद्धालुओं को पानी में खड़े होकर आरती करनी पड़ी। रेलवे स्टेशन, पुराने कलेक्ट्रेट और न्यायालय परिसर जैसे सरकारी भवन भी बारिश के पानी से अछूते नहीं रहे।
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शाम 7:30 बजे से रात 8:30 बजे तक हुई करीब 14 एमएम बारिश के बाद जलभराव की सबसे गंभीर स्थिति स्टेशन रोड पर रही। पेट्रोल पंप तिराहे से पुराने तहसील कार्यालय तक सड़क पर घुटनों तक पानी भर गया। नालियों की पर्याप्त निकासी न होने से बारिश का पानी काफी देर तक सड़क पर जमा रहा। ललितपुर टॉकीज के पास नझाई बाजार और जूता बाजार में भी पानी भर गया। गोविंद नगर और करमाबाई नगर की गलियों में पानी घरों तक पहुंच गया।

पंडाल में घुटनों तक पानी, बाल्टी से निकालते रहे पानी
फोटो-31-आशीष जैन।
नई बस्ती में पुराने आईटीआई के पास लगाए गए गणेश पंडाल के आसपास पूरी गली पानी में डूब गई। पंडाल के अंदर भी पानी पहुंच गया। इसके बावजूद बच्चों और श्रद्धालुओं ने देर रात पानी में खड़े होकर आरती की। लोगों ने बाल्टियों से पंडाल का पानी बाहर निकाला। स्थानीय निवासी आशीष जैन ने बताया कि गली और पंडाल में घुटनों तक पानी भर गया था। लोगों ने मिलकर बाल्टियों से पानी बाहर निकाला। बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति भी प्रभावित रही, जिससे परेशानी और बढ़ गई।
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स्टेशन से कचहरी तक सरकारी भवनों में टपकता रहा पानी
बारिश का असर केवल सड़कों और मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर स्टेशन अधीक्षक कार्यालय के सामने टिनशेड से झरने की तरह पानी गिरता रहा। नए स्टेशन भवन में भी कई जगह पानी टपका। पुराने कलेक्ट्रेट भवन में उपभोक्ता फोरम और जिला पूर्ति विभाग के कार्यालयों की छतों और दीवारों से पानी रिसता रहा। न्यायालय परिसर के ब्लॉक-सी में अधिवक्ताओं के चैंबर भी बारिश से प्रभावित हुए। गैलरी और सीढ़ियों पर पानी भर गया।

दो करोड़ रुपये के बाद भी सवाल कायम
शहर में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए इस वर्ष नगर पालिका को दो करोड़ रुपये मिलने की बात कही गई है। इसके बावजूद एक तेज बारिश में प्रमुख सड़कें और मोहल्ले पानी में डूब गए। इससे जल निकासी के लिए किए गए इंतजामों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश से पहले नालों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था के दावे किए जाते हैं, लेकिन बारिश होते ही वही स्थान जलभराव की चपेट में आ जाते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि दो करोड़ रुपये की राशि से किन-किन स्थानों पर क्या काम कराए गए और उनका असर बारिश के दौरान क्यों नजर नहीं आया।

कोट
जिन इलाकों में बारिश का पानी भरा है, वहां फर्श का ढलान सही कराकर जल निकासी की व्यवस्था कराई जाएगी। -दिनेश कुमार विश्वकर्मा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका

सुलगते सवाल
- दो करोड़ रुपये मिलने के बाद भी प्रमुख सड़कें पानी में क्यों डूबीं?
- बारिश से पहले नालों की सफाई और जल निकासी की व्यवस्था कितनी प्रभावी रही?
- जिन स्थानों पर हर साल जलभराव होता है, वहां स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ?
- गणेश पंडाल और घरों तक पानी पहुंचने से पहले जल निकासी के इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
-सरकारी भवनों की छतों से पानी टपकने की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?

फोटो-32
कैप्सन-अनुभव।
तेज बारिश होने के कारण गली में और गणेश पंडाल में पानी जमा हो गया। इससे पूजन आरती के लिए भक्तों को परेशान होना पड़ा। बारिश के दौरान बिजली भी चली गई, इससे मोहल्लेवासियों को काफी परेशान होना पड़ा।-अनुभव।

फोटो-33
कैप्सन- हरीबाबू शर्मा।
बारिश में जगह-जगह जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई। वाहन चालकों व पैदल राहगीरों को भी निकलने में परेशानी हुई। जबकि जलभराव की समस्या के निस्तारण के लिए इस बार नगर पालिका में दो करोड़ रुपये आए थे, लेकिन पालिका के दावे फेल हो गए हैं। हरीबाबू शर्मा
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