ललितपुर। विकास खंड मड़ावरा को शासन ने आकांक्षात्मक ब्लॉक घोषित करते हुए विभिन्न विभागों को स्वास्थ्य एवं पोषण, शिक्षा, बुनियादी ढांचे मजबूत करने का लक्ष्य दिया था। लेकिन, शासन से मिली रिपोर्ट में दो साल बाद भी इन बिंदुओं पर कोई खास काम नहीं हुआ। यह स्थिति तब है जब इस क्षेत्र के विधायक राज्यमंत्री हैं और आए दिन अधिकारी यहां का दौरा करते रहते हैं। सीडीओ ने संबंधित अफसरों पर शिकंजा कसते हुए शासन के निर्देशानुसार कार्य करने के आदेश दिए हैं।
नीति आयोग ने वर्ष 2023 में जिले के इस सबसे पिछड़े ब्लॉक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए आकांक्षात्मक विकास खंड की सूची में शामिल किया था। लेकिन, दो साल बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। यहां माध्यमिक शिक्षा के लिए एक भी सरकारी इंटर कॉलेज नहीं बन सका। वनांचल में बसे लखंजर, कुर्रट, जैतुपुरा, वनगुवां जैसे गांवों में अधिकांश छात्राएं आठवीं के बाद की पढ़ाई छोड़कर घर बैठ जाती हैं। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र महज रेफर सेंटर की तरह है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। गर्भवती महिलाओं के सिजेरियन ऑपरेशन की कोई व्यवस्था नहीं है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट न होने से सोनोग्राफी मशीन धूल फांक रही है।
पक्की सड़कों की कमी है। यहां जो पहले से निर्मित पक्की सड़कें हैं, वे भी जर्जर हो रही हैं। हर-घर-जल योजना के तहत पाइप लाइन डालने के लिए गांवों में खोदी गई सीसी रोड ठीक से मरम्मत के अभाव में खुदी पड़ी हैं। जागरुकता की कमी के चलते पेयजल का दुरुपयोग और लीकेज से पानी बर्बाद हो रहा है। वनांचल में बसे गांवों में नमामि गंगे के तहत पाइप लाइन नहीं डाली गई। ग्रामीण हैंडपंप और कुओं से पानी लेने को विवश हैं।
बाल पोषण की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। बाल विकास परियोजना के अंतर्गत संचालित अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार वितरण की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है। महिलाओं का कहना कि पोषाहार के नाम पर सिर्फ गेहूं का दलिया बांटा जाता है।
अधिकारियों के दौरे व रिपोर्टिंग तक ही रहे सीमित
यहां अधिकारियों के दौरे होते हैं। इसके बाद व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए जाते हैं। लेकिन, व्यवस्था जस की तस बनी हुई है। टेबल रिपोर्टिंग के आधार पर ब्लॉक का विकास किया जा रहा है।
आकांक्षात्मक विकास खंड का विकास शासन के नियमों के अनुसार कराया जा रहा है। जो कमियां हैं, उन्हें संबंधित विभाग से समन्वय स्थापित कर दूर कराई जाएंगी।-शेषनाथ चौहान, सीडीओ